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पुष्यभूति वंश / वर्धन वंश


पुष्यभूति वंश / वर्धन वंश

* इस वंश के संस्थापक पुष्यभूति वर्धन थे। जो गुप्तकाल में एक सामंत थे ।

* इन्होंने अपनी राजधानी हरियाणा के थानेश्वर को बनाया । * इस वंश का अगला शासक प्रभाकर वर्धन थे 
*प्रभाकर वर्धन के 3 संतान थीं। (i) राजवर्धन (ii) हर्षवर्धन (iii) राजश्री

* राजश्री का विवाह कन्नौज के राजा ग्रहवर्मन से हुआ।

मालवा के शासक देवगुप्त ने ग्रहवर्मन की हत्या कर दी और राजश्री की हत्या करने का भी प्रयास किया। किन्तु राजश्री जंगल में भाग गई ।

* राजवर्धन में देवगुप्त की हत्या कर दी ।

* गौढ़ (बंगाल) शासक शशांक ने राजवर्धन की हत्या कर दीया। साथ ही इसने बौद्धी वक्ष को भी कटवा दिया ।

* वर्तमान बौद्धी वक्ष छठी पीढ़ी का है। हर्षवर्धन ने शशांक की हत्या कर दी ।

* हषवर्धन के सामने 2 चुनौती थी (i) राजश्री का पता लगाना । (ii) साम्राज्य को संभालना

* हर्षवर्धन ने दिवाकर नामक बौद्ध भिक्षुक के सहयोग से राजश्री का पता लगाया।

* हर्षवर्धन ने अपनी राजधानी कन्नौज को बनाया और अपने साम्राज्य को संभालने लगा।

* हर्षवर्धन ने कभी भी स्वयं को कन्नौज का राजा साबित नहीं किया बल्कि राजश्री का संरक्षक बनकर शासन किया।
हर्षवर्धन साहित्य प्रेमी था। इसने 3 पुस्तकों की रचना की (2) रत्नावली ।

(1) नागानंद (3) प्रियदर्शिका

* हर्षवर्धन के दरबारी कवि बाणभट्ट थे।

* इन्होंने 2 पुस्तकों की रचना की

(1) कादम्बरी

(2) हर्षचरित्र

* हर्षवर्धन को शिलादित्य कहा जाता है।

* इसके काल में चोर तथा डाकुओं का बोल बाला * इसके समय मथुरा सूती वस्त्र का केन्द्र था

* इसके समय चीन का यात्री ह्वेनसांग भारत की यात्रा किया।

* 629 ई. में जब हवेनसांग आया था। नालंदा विश्वविद्यालय के कुलपति शीलभद्र थे। 
* ह्वेनसांग को यात्रियों का राजकुमार नीति का पंडित तथा शाक्य मुनि कहा जाता है।

* इसने नालंदा विश्वविद्यालय में अध्ययन अध्यापन (student) तथा अध्यापन (teacher) का कार्य किया।

* ह्वेनसांग की विद्वता को देखकर हर्षवर्धन ने प्रत्येक 5 वर्ष पर प्रयाग में होने वाले महामोक्ष परिषद् का अध्यक्ष हवेनसांग को बना दिया, जिस कारण ब्राह्मणों ने हर्षवर्धन का विरोध किया ।

* हर्षवर्धन हिन्दू था किन्तु महायान शाखा से प्रभावित था । * इसके समय कन्नौज में बहुत बड़े बौद्ध सम्मेलन का आयोजन किया गया।

* इसे 5वीं बौद्ध संगिती भी कहते हैं।

* हर्षवर्धन समस्त उत्तर भारत को जीत लिया था, किन्तु कश्मीर को अपने क्षेत्र में नहीं मिला पाया

* हर्षवर्धन ने दक्षिण भारत अभियान प्रारंभ किया किन्तु नर्मदा नदी के तट पर दक्षिण भारत के चालुक्य शासक पुलकेशिन द्वितीय ने इसे पराजित कर दिया ।

* इसकी जानकारी पुलकेशिन-II का कर्नाटक में स्थित "एहोर" अभिलेख से मिलती है। 647 ई. में हर्षवर्धन की मत्यु हो गई ।
* हर्षवर्धन की कोई संतान नहीं थी, जिस कारण वर्धन वंश का पतन हो गया।

* हर्षवर्धन की मौत के बाद उत्तर भारत में राजनीतिक शून्य (सन्नाटा) की स्थिति आ गई।

* इतिहास में हर्षवर्धन के मृत्यु को  "युग परिवर्तन" का काल कहते हैं    

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