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आजादी के आस में बलूचिस्तान

बलूचिस्तान को पाकिस्तान के क्षेत्रफल के हिसाब से सबसे बड़ा राज्य  हैं , खनिज संपदा से परिपूर्ण , समुंदर से मिलता राज्य फिर बलूच जनता शिक्षा, आर्थिक स्थिति, स्वास्थ्य सुविधा की दृष्टि से  पाकिस्तान के अन्य राज्य से काफी पीछे हैं । बलूच लोग अपने को पाकिस्तानी नही मानते वो अपना एक अलग देश की मांग करते हैं या उनका मांग है कि बलूच को पाक में ही एक स्वतंत्र देश बना दिया जाए। 
      1947 से पहले बलूच एक स्वतंत्र प्रांत के रूप में हुआ करता था  जिसपर ब्रिटिश शासन का सीधा शासननही था। लेकिन  मार्च 1948 मे पाकिस्तान ने उस पर सैन्य कार्रवाई के द्वारा उसे अपने में मिला दिया और वहा के राजा कोजेल में डाल दिया। पाकिस्तान उसे आजादी से ही उसके सिर्फ खनिज संपदा को उपयोग कर रहा है लेकिन विकास का सारे कार्य पाकिस्तान अपने पूर्वी और उतरी   क्षेत्र के लिए करता है। 
   बलूचिस्तान  अपने आजादी के लिए जीतने संघर्ष करता है पाकिस्तान उसे उतने ही निर्दय तरीके से कुचल देता है  । पूरे बलूचिस्तान की  अनेक महिला अपने पुरुष सदस्य को   खो है। पिता/ पति के सामने उनके सामने स्त्री सदस्य का बलात्कार कर दिया जाता हैं, बुजुर्ग महिला के सामने उनके बेटों की हत्या, लोगो के शरीर पर जबरदस्ती पकिस्तान जिंदाबाद के नारे गुदवाए जा रहे हैं। उनके आंदोलन को दबाने के मिराज जैसे जेट विमान का भी सेना सहारा लेती हैं पाकिस्तान सरकार तो ईरान को पैसे दे के बलूचिस्तान प्रांत पर बमबारी भी करवाने से नही चूकती है । बलूच लोग रातों रात गायब हो जा रहे है उनकी ना कोई पता  चलती हैं और ना ही लाश मिलती हैं । और लाशे मिलती हैं भी क्षत विक्षत । जबरन बंध्याकरण जैसे अकथनीय और अकल्पनीय अपराध हो रहे हैं जिसे बताने में पीड़ित को भी शर्म आ जाए। लेकिन पकिस्तान ने कभी किसी सैन्य अधिकारी को दंडित या कोर्ट मार्शल नही किया । जिससे साफ जाहिर होता है कि ये पाकिस्तान सरकार के  आदेश पर ही हो रहे हैं।। लेकिन बलुचो के इस दर्द को कम करने के लिए भारत सरकार ने कभी कुछ नहीं किया। । 
 बलूच कोई भी बाहरी या यू कहे कोई विदेशी सहायता नही मिल पाता।जो सम्पन्न बलूच थे वो पाक छोड़ यूके, भारत तथा अन्य देशों मे बस चुके हैं। 
       बलूच आंदोलन को पकिस्तान सेना ने ताकत के बल पर, हमेश कुचुल दिया है।  1959 में बलूच नेता नरोज खान ने इस शर्त पर हथियार डाले कि पाकिस्तानी। सरकार अपनी" वन यूनिट योजना" को वापस लेगी। लेकिन पकिस्तान सरकार ने उनके साथ धोखा किया। हथियार डालने के बाद उन्हें (80 वर्ष के उम्र में ), उनके बेटो तथा उनके समर्थकों को फांसी पर लटका दिया गया। . 
         जब भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी  15 अगस्त को लाल किले से बलूचिस्तान का जिक्र किया। तो सारी दुनिया का ध्यान बलूच की तरह गया। यह पहला मौका था जब कोई भारतीय प्रधानमंत्री ने बलूच का नाम खुले मंच से लिया हो। इसके बाद बलुचिस्तानी नेता नरेंद्र मोदी को धन्यवाद दिया। लेकिन पाकिस्तान सरकार ने वहा के लोगो को बलूच लोग को पाकिस्तान के अन्य हिस्सों में इधर उधर बसाने लगी। और पकिस्तान के अन्य लोगों को बलूच में बसाने लगे।  वर्तमान समय में बलूच लोग अपने ही क्षेत्र में कम हो रहे हैं। लेकिन बलूच लोग अभी आंदोलित है । और वो लोग किसी विदेशी सहायता के और देख रहे हैं।


  मुझे जंग-ए-आज़ादी का मज़ा मालूम है

बलूचिस्तान पर ज़ुल्म की इंतेहा मालूम है, मुझे ज़िंदगी 

   भर पाकिस्तान में जीने की दुआ ना दो, मुझे

 पाकिस्तान में इन साठ साल जीने की सज़ा मालूम है.
        हबीब जालिब ( बलूच  क्रांतिकारी एवं व्यवस्था विरोधी)
Study 24 hr

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