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तुगलक वंश ( tugalak vansh)(1320-1414)


ग्यासुद्दीन तुगलक

* गाजी मलिक ने तुगलक वंश की स्थापना की और ग्यासुद्दीन तुगलक के नाम से अपना राज्याभिषेक करवाया।

यह किसानों की सहायता के लिए नहर निर्माण का कार्य प्रारंभ किया, हालांकि नहरों का जाल फिरोजशाह तुगलक ने बिछा दिया।

܀ ग्यासुद्दीन तुगलक ने अपना पहला अभियान जौनाखान के नेत त्व में तेलंगाना के लिए किया ।

* जौना खान ने तेलंगाना जीतकर उसका नाम सुल्तानपुर रख दिया।

܀ इस विजय के बाद जौना खान को मोहम्मद बिन तुगलक कहा गया।

* ग्यासुउद्दीन तुगलक ने खुद के नेतृत्व  में बंगाल अभियान किया, किन्तु बंगाल से इसे धन की प्राप्ति नहीं हुई।

* इसने निजामुद्दीन औलिया को संदेश भिजवाया कि मेरे
दिल्ली पहुंचने तक दान में दी गई भूमि का हिसाब तैयार रखे।  इसके उत्तर में निजामुद्दीन औलिया ने कहा कि "हुजुर
दिल्ली अभी दूर है।" 
* मोहम्मद बिन तुगलक ने U.P. के अफगानपुर में ग्यासुद्दीन तुगलक के विश्राम के लिए लकड़ी का महल बनवाया किन्तु इस महल के गिरने से ग्यासुद्दीन तुगलक की मृत्यु हो गई।

मोहम्मद बिन तुगलक

* इसका मूल नाम जौना खां था ।

܀ यह 23 भाषाओं का अच्छा जानकार था, साथ ही ज्योतिष, खगोल तथा गणित का भी अच्छा विद्वान था ।
܀ यह इतिहास में सबसे पढ़ा-लिखा शासक था।

* इसके समय सल्तनत काल का विकास बहुत तेजी से हुआ, साथ ही बिखराव भी तेजी से हुआ। मोहम्मद बिन तुगलक ने 5 सबसे बड़ी गलतियों की

(1) इसने दोआब पर तब tax बढ़ा दिया जब वहां अकाल पड़ा था। किसानों के विद्रोह के कारण इसने अमिर कोहि नामक विभाग बनाया जो किसानों की मदद के लिए था।

(2) इसने ताँबे की सांकेतिक मुद्रा चलवायी, किन्तु इस मुद्रा का बड़े पैमाने पर दुरूपयोग होने लगा।
 (3) इसने मंगोल आक्रमण के डर से तथा दक्षिण में इस्लाम के प्रसार के लिए राजधानी देव गिरि (दौलताबाद) में स्थानांतरित की जो असफल रहा।

(4) इसने खुरासान ( इरान) पर आक्रमण के लिए 3 लाख सैनिकों की फौज बनायी और उन्हें अग्रीम वेतन भी दिया, किन्तु अंतिम समय में वह खुरासान के शासक से संधि कर लीया

(5) इसने सैनिकों के विद्रोह से बचने के लिए उन्हें हिमालय की दुर्गम्य चोटी कराचील अभियान के लिए भेजा जहां अधिकांश सैनिक आपसी विवाद में लड़कर मर गए।

1336 ई. में हरिहर एवं बुक्का ने दिल्ली सल्तनत से टूट कर विजय नगर की स्थापना कर ली।

1347 ई. में हसन गंगु ने दिल्ली सल्तनत से टूट कर बहमनी साम्राज्य की स्थापना कर ली।

1333 ई. में मोरक्को (अफ्रीका) का यात्री " इब्नबतुत्ता" 7000 km की यात्रा के बाद दिल्ली पहुंचा। 
* मोहम्मद बिन तुगलक इसकी विद्वता से खुश हुआ और उसे दिल्ली का काजी (जज) नियुक्त किया। 
* इब्नबतूता के कहने पर ही M.B.T. ने डाक विभाग प्रारंभ किया ।

* इब्नबतुता के नेत त्व में M.B.T. ने एक दूत मंडल चीन भेजा। * मोहम्मद बिन तुगलक होली का त्योहार अपने दरबार में मनाता था। • मोहम्मद बिन तुगलक का कहना था कि मेरा राज्य रूग्न (बीमार) हो चुका है।

 M.B.T. की मत्यु पर इतिहासकारों का कहना है कि जनता को अपने राजा से एवं राजा को अपनी जनता से छुटकारा मिल गया!

फिरोज शाह तुगलक

܀ यह जौना खाँ का चचेरा भाई था। इसकी माता सोनार थी। अतः इस पर हिन्दु होने का आरोप न लगे इसलिए इसने ब्राह्मणों पर भी जजीया कर लगा दिया। * इसने अशोक के हरियाणा के टोपरा अभिलेख को तथा U.P.
के मेरठ अभिलेख को दिल्ली में स्थापित कर दिया। इसने अलग से एक निर्माण विभाग बनवाया और 300 से अधिक नगर (शहर) का निर्माणय कराया।
जैसे- जौनपुर, फिरोजाबाद, फैजाबाद।
 * इसने 1200 से अधिक फलों के बाग-बगीचे लगवाएं ताकि फलों की गुणवत्ता को सुधारा जा सके।

* इसने नहरों का जाल बिछा दिया। 
* जो किसान सरकारी नहर से खेती करता था उसे "हक-ए-शर्ब" नामक कर देना होता था, जो कुछ ऊपज का 10% या 1110 भाग देना होता था ।

* E.S.T. के दरबार में सर्वाधिक दास 1 लाख 80 हजार थे। 
* इसने दासों की देखभाल के लिए एक अलग विभाग "दिवान-ए-बंदगान" बनाया ।

* इसने बेरोजगारों को बेरोजगारी भत्ता भी दिया।

* गरीब, असहाय तथा अनाथ की सहायता के लिए इसने एक अलग विभाग दिवान-ए-खैरात बनवाया।

* इसने दर- ऊल- शफा नामक एक मुफ्त अस्पताल बनवाया।
 * इसने सरकारी खर्च पर हज यात्रा करवायी।

* विभिन्न धर्मों में आपसी समन्वय के लिए इसने एक अनुवाद विभाग बनवाया।

* F.S.T. को सल्तनत काल का अकबर कहते हैं। 
नसीर-ऊ-द्दीन महमूद

* नसीरुद्दीन महमूद के समय तुगलक वंश का बिखराव बहुत तेजी से होने लगा।

इसके बारे में कहा जाता है कि इसका साम्राज्य दिल्ली से पालम तक था। 
* इसके पंजाब का खिज्र खां ने खुद को स्वतंत्र घोषित
कर दिया।

1398 ई. में मिशोल सेनापति तैमूर लंग ने इस पर आक्रमण किया ।

* तैमूर लंग के डर से यह दिल्ली छोड़ के भाग गया। 
* तैमूर लंग ने खिज खां को दिल्ली का सूबेदार नियुक्त किया ।

* तैमूर के आक्रमण से तुगलक वंश का अंत हो गया। इस

प्रकार इस वंश का अंतिम शासक नसीरूद्दीन महमूद था । 1414 ई. में खिज्र खां ने इसकी हत्या कर दी। 
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