https://youtu.be/JJda6HL7uFw

नाभिकीय रसायन ( NUCLEAR CHEMICAL )


नाभिकीय रसायन

🔹 इसमें नाभिक के विखंडन तथा संलयन का अध्ययन करते हैं।

नाभिकीय संलयन (Nuclear Fusion) :-

🔹इस अभिक्रिया में दो छोटे नाभिक आपस में जुड़कर एक बड़े नाभिक का निर्माण करते हैं और अत्यधिक मात्रा में ऊर्जा निकालते हैं।
नाभिकीय संलयन अभिक्रिया प्रारंभ करने के लिए हजारों डिग्री सेल्सीयस तापमान की आवश्यकता होती है। जिस कारण नाभिकीय संलयन होने पर पदार्थ अपनी चौथी अवस्था प्लाजमा अवस्था में चला जाता है।

 🔹नाभियकीय संलयन अभिक्रिया नियंत्रण में नहीं आ सकती।

🔹सूर्य, तारा तथा हाइड्रोजन बम में ऊर्जा का स्त्रोत नाभिकीय संलयन है। इसमें हाइड्रोजन का नाभिक हिलीयम में परिवर्तित होता रहता है और अत्यधिक मात्रा में ऊर्जा निकालता है।

🔹हाइड्रोजन बम का खोज टेलर ने किया था हाइड्रोजन बम विस्फोट करने के लिए अत्यधिक ऊर्जा कीआवश्यकता होती है। जिस कारण पहले परमाणु बम फोड़ा जाता है और उससे ऊर्जा प्राप्त करके हाइड्रोजन बम की संलयन अभिक्रिया प्रारंभ की जाती है। यही कारण है कि हाइड्रोजन बम परमाणु बम की तुलना में कई गुना अधिक खतरनाक होता है।

नाभिकीय विखण्डन (Fission)

🔹इसमें एक बड़ा नाभिक दो छोटे नाभिकों में टूट जाता है और अत्यधिक मात्रा में ऊर्जा निकालता है।
 🔹नाभिकीय विखण्डन में निकलने वाला विकिरण संलयन से अधिक खतरनाक होता है।
🔹 नाभिकीय विखण्डन अभिक्रिया को नियंत्रित किया जा सकता है।

🔹यदि नाभिकीय विखण्डन अनियंत्रित हो गया तो वह परमाणु बम (Atom Bomb) का रूप ले लेगा।

🔹परमाणु बम का आविष्कार ऑटो हॉन ने किया।

🔹भारत ने अपना पहला परमाणु बम 18 May 1974 को इस्माइलिंग बुद्धा नाम से परीक्षण किया था।

🔹भारत ने अपना दूसरा परमाणु परीक्षण 11 तथा 13 May 1998 को शक्ति-98 नाम से कयिा। परमाणु बम में ईंधन के रूप में यूरेनियम तथा पोलोनियम का प्रयोग करते हैं। यूरेनियम को Yellow Cake कहा जाता है।

परमाणु रिएक्टर

🔹जिस स्थान पर परमाणु विखण्डन की क्रिया करायी जाती है, उसे परमाणु रिएक्टर कहते हैं।

🔹भारत का पहला परमाणु रिएक्टर ट्राम्बे (मुम्बई) में स्थित भाभा परमाणु अनुसंधान केंद्र (BARC Bhabha Atomic Research Centre) में 1956 में अप्सरा को लगाया गया। 

🔹 भारत का कामिनी रिएक्टर कल्पक्कम में स्थित है। 
1954 में परमाणु ऊर्जा आयोग द्वारा परमाणु ऊर्जा संस्थान की स्थापना । इसका का उद्‌घाटन नेहरू ने 1957 में किया। 

🔹24 जनवरी 1966 में होमी जहांगीर भाभा की मृत्यु के बाद परमाणु ऊर्जा संस्थान का नाम बदल क भाभा परमाणु अनुसंधान केंन्द्र 1967 में कर दिया गया।

सुरक्षा दिवाल (Safety wall) :

🔹विखण्डन अभिक्रिया से निकले विकिरण को रोकने के लिए कंक्रिट की 6-10m मोटी दिवाल होती है। यह विकिरण की बाहर नहीं जाने देता। इसी के अन्दर विखण्डन अभिक्रिया होता है।

नियंत्रक छड़:-

🔹विखण्डन के फलस्वरूप तीन न्यूट्रॉन उत्सर्जित होते हैं इनमें दो न्यूट्रॉनों को कैडमियम या बोरॉन का छड़ लगाकर सोख लिया जाता है ताकि विखण्डन अभिक्रिया नियंत्रित (fission reaction control) रह सके। इसी छड़ को नियंत्रक छड़ कहते हैं। 

मंदक ( Moderator)

🔹न्यूट्रॉनों की गति कम करने के लिए ग्रेफाइट या भारी जल (D2O) का प्रयोग किया जाता है जिसे मंदक (Moderator) कहते हैं।

Remark:- जब मंदक के रूप में भारी जल का प्रयोग किया जाता है तो स्वीमिंग पुल कहते हैं। किन्तु जब मंदक के रूप में ग्रेफाइट का प्रयोग करते हैं तो उसे परमाणु पाइल कहते हैं।

शितलक (Coolant):

🔹परमाणु रिएक्टर को अत्यधिक ताप से बचाने के लिए द्रवित सोडियम या पोटैशियम का प्रयोग करते हैं। जिसे शितलक कहते हैं।

🔹एक अच्छे शितलक में यह गुण होना चाहिए कि वह न्यूट्रॉनों को न अवशोशित करें।

Remark :- जरकोनियम (Zr) ऑक्सीजन तथा नाइट्रोजन दोनों की उपस्थिति में जलता हैं यह परमाणु घर में अनिवार्य बिजली रूप से प्रयोग होता है।

🔹भारत का पहला परमाणु बिजली घर 1972 में महाराष्ट्र के तारापुर में लगाया गया। (USA के सहयोग से) शुरुआत - 1969 से)

न्यूट्रॉन बम:-

🔹यह बम केवल जीव-जन्तुओं को नुकसान पहुंचाता है। भवन / इमारतों का कोई छति नहीं पहुँचता है।

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