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हुमायूं (Humayu)

     हुमायूं ( 1530-1556 )




🔹हुमायुं बाबर के 4 बेटों में से सबसे बड़ा था। बाबर के कहने पर हुमायुं ने अपने राज्य को 4 भाइयों में बांट दिया। जो हुमायुं की सबसे बड़ी भूल साबित हुआ।

हुमायूं के लिए चुनौती- 1. राज्य का बँटवारा 2. धन की कमी 3. राजपूत का विरोध 4. अफगान

🔹बाबर ने अफगान शासकों का पूर्णतः सफाया नहीं किया था, जिस कारण अफगान शासक हुमायुं के लिए सबसे बड़ा
खतरा बने लगे। हुमायूं का राज्याभिषेक 1530 ई. में हुआ।

🔹हुमायुं का प्रारम्भिक शासन शांतिपुर्ण था। किन्तु हुमायुं के ही प्रमुख विरोधी थे एक गुजरात का शासक बहादुर शाह तथा एक बिहार का शासक शेरशाह सूरी।

🔹 हुमायूं ने सर्वप्रथम पानीपत के प्रथम युद्ध में बाबर के साथ हिस्सा लिया था, यह उसके जीवन का प्रथम युद्ध था। 🔹 चितौड़ की रानी, कर्णवाही ने गुजरात के शासक बहादुर शाह के अत्याचार से बचने के लिए हुमायुं से मदद मांगी और भेंट स्वरूप उसे राखी दिया। हुमायूं कर्णवाहि की रक्षा के लिए सेना लेकर चल दिया किन्तु कालींजर के शासक प्रताप रूद्र देव से हुमायूं का युद्ध हो गया और हुमायूं के पहुँचने में देर हो गयी तब तक कर्णवाहि जौहर कर चुकी थी।

🔹हुमायुं बहादुर शाह को पराजित करने के लिए 1531 में सर्वप्रथम कालिंजर अभियान किया। 
🔹कालिंजर अभियान हुमायुं का शासक बनने के बाद पहला अभियान था।
🔹 हुमायुं का अफगानों विरूद्ध पहला अभियान 1532 का दोहरिया का अभियान था। जिसमें हुमायुं विजयी रहा।

🔹1538 में हुमायुं ने गौड़ (बंगाल) अभियान किया। इसने बंगाल का नाम जन्नताबाद रखा। 
🔹बंगाल अभियान से लौटते समय उसकी सेना पर शेरशाह सूरी ने 1539 में अचानक चूनार की किला के पास चौसा नामक स्थान पर हुमायूं पर आक्रमण कर दिया। हुमायूं की सेना में भगदड़ मच गयी और पराजय की स्थिति में हुमायुं घोड़ा सहित गंगा नदी में कुद गया। हुमायूं की जान शिहाबुद्दीन निजाम नामक भिस्ती (मल्लाह) ने बचायी इसी कारण उसने शिबुद्दीन निजाम को एक दिन के लिए दिल्ली का शासक बनाया। इसी ने अपने एक दिन के कार्यकाल में चमड़े का सिक्का चलाया।

🔹इसकी जानकारी हुमायुनामा नामक पुस्तक से मिलती है। जिसकी रचना हुमायुं की बहन गुलबदन बेगम ने किया। यह पुस्तक दो भागों में हैं प्रथम भाग में बाबार तथा द्वितीय भाग में हुमायुं की चर्चा है।

🔹यह मुगलकाल की एक मात्र पुस्तक है जिसकी रचना किसी महिला ने की।

🔹1540 ई. में शेरशाह सूरी ने बिलग्राम (कन्नौज) के युद्ध में हुमायुं को हराया और उसे भारत छोड़ने पर विवश कर दिया और 1540 में शेरशाह सूरी ने खुद को दिल्ली का शासक घोषित कर दिया।

🔹भारत से निष्कासन के दौरान हुमायुं ने अपनी गर्भवती पत्नी हमिदा बानों बेगम को अमरकोट (पंजाब) के राजा वीरशाल के दरबार में छोड़कर चला गया।
🔹इन्हीं के दरबार में 15 अक्टूबर, 1542 को अकबर का जन्म हुआ।

🔹1545 ई. में शेरशाह की मृत्यु हो गयी उसके बाद अफगानी का कोई बड़ा शासक नहीं हुआ।
🔹 निर्वासन के दौरान हुमायूं काबुल में रहा। हुमायूं ने पुनः 1545 ई. में ईरान के शासक की सहयता से कंधार एवं काबुल पर अधिकार कर लिया।

🔹1553 ई. में शेरशाह के उत्तराधिकारी इस्लामशाह की मृत्यु के बाद अफगान साम्राज्य विघटित होने लगा अतः ऐसी स्थिति में हुमायूं को पुनः अपने राज्य प्राप्ति का अवसर मिला।

🔹1555 ई. में लुधियाना के नजदीक मच्छीवाड़ा के युद्ध में हुमायूं ने अफगान सरदार हैवत खान तथा तातार खान को हरा करके पंजाब जीत लिया।

🔹 1555 ई. में ही सरहिन्द के युद्ध (चण्डीगढ़) के युद्ध में हुमायूं के सेनापति बैरमखान ने अफगान सेनापति सिकन्दरशाह सूर  को पराजित कर दिया।

🔹सरहिंद युध्द के  विजय के पश्चात 1555 ई. में एक बार फिर से दिल्ली के तख्त पर हुमायूं को बैठने का सौभाग्य मिला। लेकिन ये ज्यादा तक शासन न कर सका। 

🔹हुमायुं ने दिल्ली में  जो दिन-पनाह नामक पुस्कालय बनवाया था। इसी पुस्तकालय की सीढ़ियों से गिर कर हुमायुं की मृत्यु हो गयी और 1556 में हुमायुं की मृत्यु हो गई।

🔹हुमायुं अफीम का सेवन का आदि था। यह ज्योतिष में विश्वास रखता था जिस कारण हरेक दिन अलग-अलग रंग के वस्त्र पहनता था।

🔹हुमायुं के दरबार में दो प्रमुख चित्रकार-मीर सैय्यद अली तथा अब्दुल समद रहते थे।

🔹लेनलपु ने लिखा है हुमायूं का अर्थ होता है खुशनसिब व्यक्ति लेकिन हुमायुं जीवन भर लडखराते रहा और लडखराते हुए ही उसकी मृत्यु हो गयी।

🔹हुमायूं की कब्र ईरानी संस्कृति से प्रभावित है, जिसका वास्तुकार मिर्जा-ग्यास बेग था। यह  हुमायु की पत्नी हमीदा बानो बेगम की हुमायूं को अमूल्य भेंट थी। यह मकबरा दिल्ली में स्थित है।

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