https://youtu.be/JJda6HL7uFw

मुगल काल ( mugal kal)

मुगल वंश 

💠बाबर
🔹तैमुर के मृत्यु के बाद मध्य एशिया में अनेक छोटे-छोटे राज्यों का उदय हुआ। उन्हीं राज्यवंशों में से एक मुगल था। 🔹मुगल वंश का संस्थापक बाबर को माना जाता है। बाबर का वास्तविक नाम 'जहीरुद्दीन मुहम्मद था। 
🔹तुर्की भाषा में बाबर का अर्थ बाघ होता है। अतः जहीरुद्दीन मोहम्मद अपने पराक्रम एवं निर्भिक्ता के कारण बाबर कहलाया। 



🔹बाबर का जन्म 11 फरवरी, 1483 को फरगना के एक छोटे से राज्य में हुआ जो अब उजवेकिस्तान में है। इसके पिता उमर शेख मिर्जा (तैमूर वंशज) तथा माता कुतुलुवनिगार खान (मंगोल वंशज) जो चंगेज खां को वंशज थी। इसलिए इसे तुकों एवं मंगोलो दोनों के रक्त का मिश्रण था।

🔹बाबर अपनी दादी एहसान दौलतवेग के सहयोग से 11 वर्ष की आयु में 1494 ई. में फरगना का शासक बना और मिर्जा की उपाधि धारण किया। बाबर ने 1501 में समरकंद जीत लिया किन्तु यह जीत केवल आठ महिने ही रही। बाबर ने काबुल और गजनी पर अधिकार कर लिया।

🔹1507 ई. में इसने मिर्जा की उपाधि त्याग किया और पादशाह ('बादशाह) की उपाधि hu किया।

🔹बाबर ने जिस नए वंश की स्थापना किया उसका नाम चगताई तुर्क था बाबर को भारत की ओर आक्रमण करने के लिए इसलिए मजबूर होना पड़ा कि उसके पड़ोस के शासक उससे हमेशा युद्ध करते रहते थे।
🔹 बाबर पानीपत के प्रथम युद्ध से पहले भारत पर 4 बार आक्रमण किया। पानीपत का प्रथम युद्ध उसका भारत पर 5वां आक्रमण था। 1519 ई. में बाबर ने पहला बाजौर अभियान किया था। उसी आक्रमण में ही उसने भेड़ा के किला को जीत लिया। बाबर ने इस किले को जीतने के लिए सर्वप्रथम बारुद और तोप का प्रयोग किया।

🔹पानीपत के प्रथम युद्ध के लिए बाबर को निमंत्रण पंजाब का सुवेदार दौलत खां लोदी, इब्राहिम लोदी के चाचा आलम खां लोदी तथा राणासांगा ने दिया।

🔹पानीपत के प्रथम युद्ध 1526 ई. में बाबर ने उजबेको की युद्ध नीति तुगलमा (अर्धचन्द्रकार) निति तथा तोपो को सजाने में उस्मानी विधि (रूमी विधि) का प्रयोग किया और इब्राहिम लोदी को पराजित कर दिया और युद्ध में इब्राहिम लोदी मारा गया।

🔹दिल्ली सलतनत का एक मात्र शासक इब्राहिम लोदी था जो युद्ध में मारा गया था। 
🔹भारत में तोप (कैनन) का प्रयोग पहली बार बावर ने ही किया था।

🔹पानीपत के युद्ध में बाबर के तोपखाने नेतृत्व उस्ताद अली और मुस्तफा खां नामक दो तुर्की अधिकारियों ने किया।
🔹 तुगलमा निति को अर्धचन्द्रकार निति भी कहते हैं। इस निति के सफलता का मुख्य स्रोत तोपो की उपस्थिति थी। पानीपत का युद्ध परिणाम के दृष्टि से महत्वपूर्ण नहीं था। फलस्वरूप इस युद्ध में भारत के भाग्य नहीं बल्कि लोदियों के भाग्य का निर्णय था।

Trick---

पान.                     खा।           चांद।            के घर
1526                1527        1528।           1529
पानीपत।             खनावा        चंदेरी।            घाघरा
(इब्राहिम लोदी)  (राणा सांगा) (मेदनी राय)(अफगानसेना)



🔹बाबर का पसंदीदा शहर काबुल था।
🔹पानीपत के प्रथम युद्ध के विजय के बाद बाबर ने काबुल के प्रत्येक निवासी को एक-एक चांदी का सिक्का दिया और कलन्दर (दानी) की उपाधि धारण किया।
🔹पानीपत का प्रथम युद्ध में बाबर ने यह निर्णय नहीं किया था कि वह भारत में स्थायी रूप से रहेगा। जैसे ही बाबर ने भारत में रहने का योजना बनाया तो राणासांगा ने विरोध कर दिया। 1527 ई० में खानवा (आगरा के समीप) का युद्ध हो गया। इस युद्ध में राणासंगा के साथ इब्राहीम लोदी के भाई महमूद लोदी, आलम लोदी और चंदेरी के राजा मेदिनी राय थे। सबकी सेना आगरा आयी और उसके बाद संयुक्त सेना खानवा के मैदान में आ गयी। बाबर का मुकबला इन चारों से था। इनकी संयुक्त सेना का मुकाबला बाबर के बस की नहीं थी। बाबर ने अपने सैनिकों का मनोबल बढ़ाया और सैनिकों पर लगने वाले तमगा नामक टैक्स को खत्म कर दिया। बाबर को हर हाल में यह युद्ध जीतना था।

🔹इसी युद्ध में बाबर ने जिहाद शब्द (धर्म के लिए जनादेश) का प्रयोग किया। इस युद्ध में बाबर अपने सैनिकों को मंदिरा पीने से रोक लगा दिया। बाबर की सेना पूरी बहादुरी से लड़ी और इस युद्ध में बाबर की जीत हुई। इस युद्ध के बाद बाबर ने गाजी (युद्ध का विजेता) की उपाधि धारण कर लिया।

🔹इसी युद्ध के बाद बाबर ने यह निर्णय लिया कि वह भारत में स्थायी रूप से रहेगा।
🔹 1528 के चंदेरी (MP का ग्वालियर क्षेत्र) के युद्ध में उसने मेदनी राय को पराजित किया।

🔹1529 ई. में उसने घाघरा के युद्ध में बिहार तथा अफगान के संयुक्त सेना को पराजित कर दिया। इसका नेतृत्व महमूद लोदी ने किया था। किन्तु बाबर ने अफगानों का पूर्णतः सफाया नहीं किया। यही बचे हुए अफगान सैनिक हुमायुं के लिए खतरा बनकर सामने आए।

🔹26 दिसम्बर, 1530 को बाबर की मृत्यु हो गयी और उसे आगरा के आरामबाग में दफनाया गया। अकबर के समय इसके कब्र को आगरा से काबूल स्थानान्तरित कर दिया गया, क्योंकि बाबर की यह इच्छा थी उसे काबूल में दफनाया जाए।

🔹बाबर चार बाग शैली में आगरा में आरामबाग नामक बगीचा बनवाया था। इसमें नदी तथा नहरी द्वारा पानी देने की व्यवस्था थी। बाबर ने मुबइयान नामक एक पद्य शैली का विकास किया।

🔹बाबर को चार बाग शैली का जनक कहा जाता है।

🔹बाबर ने अयोध्या में बाबरी मस्जिद का निर्माण करवाया था। इस मस्जिद का वस्तुकार (desioner) मीर वाकि था।
🔹बाबर ने अपनी आत्मकथा तुज़ुक-ए-बाबरी (तुर्की भाषा) में यह कहता है कि उसने जिस वक्त भारत पर आक्रमण किया उस वक्त भारत में 5 मुस्लिम राज्य तथा 2 हिन्दू राज्य थे मुस्लिम राज्य में दिल्ली, मालवा, गुजरात, बहमनी तथा बंगाल था। हिन्दु राज्य में मेवाड़ तथा विजयनगर था।

🔹विजयनगर शासक कृष्ण देवराय बाबर के समकालिन थे बाबर ने इन्हें उस वक्त का सबसे शक्तिशाली शसक बताया है।

Remark-----
तुज़ुक-ए-बाबरी बाबर की आत्मकथा है, जो तुर्की भाषा में है। अब्दुल रहिम खाने खाना ने अकबर के कहने पर इसका
फारसी में अनुवाद किया। इसकी फारसी अनुवाद ही बाबर नामा कहलाता है। ,
🔹बाबर के 4 पुत्र थे। जिसमें सबसे बड़ा पुत्र हुमायुं था। बाबर अपने जीवन काल में ही हुमायूं को अपना उत्तराधिकारी बनाया था।
Trick ___
🔹 बाबर के चार पुत्रों के नाम
                    क   हा।        A।            हुमायूं
                     ⬇️ ⬇️        ⬇️             ⬇️
                 कमरान हिंदाल अस्करी।        हुमायूं


💠       शासक                                 शासनकाल

 बाबर                                       1526-1530 ई०

हुमायूँ.                                       1530-1556 ई०

अकबर.                                   1556-1605. ई०

जहाँगीर.                                   1605-1627.  ई०

शाहजहाँ.                                 1627-1658  ई०

औरंगजेब.                               1658-1707 ई०

बहादुरशाह जफर प्रथम.             1707-1712. ई०

जहाँदार शाह.                           1712-1713 ई०

फर्रूखसियर.                            1713-1719 ई०

मुहम्मद शाह.                            1719-1748ई०

अहमदशाह.                            1748-1754ई०

आलमगीर द्वितीय.                   1754-1759 ई०

शाहआलम द्वितीय.                   1759-1806 ई०

अकबर द्वितीय.                         1806-1837ई०

बहादुरशाह जफर द्वितीय            1837-1857ई०


💠 मुगलकाल में आए विदेशी यात्री

1. राल्फ फिन्च - यह एक अंग्रेज था जो अकबर के समय आया था। इसी ने अकलर को गुजरात अभियान के समय
समुन्द्र दर्शन करवाया।

2. कैप्टन हाकिंस- यह भी एक अंग्रेज था जो 1608 ई० में जहांगीर के दरबार में आया। इसका उद्देश्य जहांगीर से
व्यापारिक छूट प्राप्त करना था किन्तु जहांगीर ने इसे कोई भी छूट नहीं दिया। किन्तु इसके योग्यता से खुश होकर इसे खान की उपाधि दिया। अतः इसे इंग्लिश खान कहते हैं।
 3. टामस रो - यह भी एक अंग्रेज था। 1615 ई. में जहांगीर के समय आया। सर्वप्रथम इसिको जहांगीर ने कुरु व्यापारिक छूट दिया।

4. पियेत्रा वेलावेला-  यह इटली का रहने वाला था। ये जहांगीर के समय आया था।
5. टेरबेनियर - यह फ्रांस का रहने वाला था और शाहजहां के समय आया था। यह पेशे से जौहरी (सोनार) था।
6. वर्नियर- यह क अंग्रेज था जो शाहजहां तथा औरंगजेब दोनों के समय आया था। इसने मुगलकाल में उत्तराधिकार के युद्ध को देखा था।

7. मनुची- यह एक अंग्रेज था जो औरंगजेब के समय आया था यह पेशे से एक तोप्ची (तोप चलाने वाला) औरंगजेब ने इसे सेना में रख लिया।

💠        मुगल शासकों के असली नाम

1. बाबर                      जहीरूद्दीन मोहम्मद बाबर

2. हुमायूं.                    नसीरूद्दीन मोहम्मद हुमायूं

3.अकबर                     जलालुद्दीन मोहम्मद अकबर

4. जहांगीर                    नुर-उ- दीन मोहम्मद जहांगीर

5. शाहजहां                  सिहाबुद्दीन मोहम्मद शाहजहाँ

6. औरंगजेब                 मुहिउद्दीन मोहम्मद औरंगजेब

7. बहादुरशाह                मोअज्जम

8. मोहम्मद शाह              रौशन अख्तर

💠 मुगल सलतनत 1526 से 1857 तक रही

 🔹 इसे दो भागों में बाँटते हैं

(i). उन्नति का काल (1526-1707)

(ii). अवनति का काल (1707-1857)


💠        मुगलकालीन प्रशासनिक व्यवस्था

🔹मुगलों की भाषा फारसी थी।

🔹मुगलकाल की प्रशासनिक व्यवस्था ( राजस्व सिद्धांत) शरिअत कानून पर आधारित थी। 
🔹मुगलवंश की शुरुआत बाबर से हूयी। किन्तु बाबर अधिक समय तक शासन नहीं किया और जितना समय शासन किया। वह युद्ध में फंसा रहा। अतः बाबर ने प्रशासनिक क्षेत्र में कोई विशेष कार्य नहीं किया। बाबर का कहना था कि राजा के लिए एकांतवास तथा आलस ठीक नहीं है। 
🔹हूमायुं की शुरुआत का शासन अच्छा था। किन्तु शेरशाह ने उसे भारत छोड़ने पर विवश कर दिया और जब हूमायुं लौटा तो कुछ ही दिन बाद उसकी मृत्यु हो गयी। अतः उसने भी प्रशासनिक क्षेत्र में कोई विशेष कार्य किया।

🔹हुमायुं ने राजा को ईश्वर का प्रतिनिधि कहा। 
🔹मुगल प्रशासनिक व्यवस्था की वास्तविक शुरुआत अकबर के समय में हुआ। अकबर ने लगभग सभी क्षेत्र सुधार दिया।
🔹अकबर ने तीर्थयात्रा तथा जजिया कर समाप्त कर दिया।
🔹 भूमि सुधार के क्षेत्र में अकबर ने टोडरमल सहयोग से आइने दहशाला पद्धति लाया। जो दस वर्षों के लिए थी।

🔹अकबर ने सैन्य क्षेत्र में एक नई व्यवस्था मनसवदारी व्यवस्था लाया। 
🔹अकबर के धर्म निरपेक्षता की निति अपनाते हुए शासन किया। 
🔹अकबर ने राजपूत निति के तहत हिन्दुओं की मनसब देना प्रारम्भ किया।

🔹 अकबर ने अपनी राजधानी फतेहपुर सिकरी बनायी।

🔹जहांगीर ने प्रशासनिक क्षेत्र में सुधार के लिए न्याय पर अत्यधिक बल दिया और न्याय की एक जंजीर टंगवाई। जहांगीर ने सैन्य क्षेत्र में सिंह आश्फा तथा दो आश्फा और जिनके पास दो अधिक घोड़े थे उन्हें सिंह आश्फा कहा गया।

🔹औरंगजेब ने पुनः जजियाकर प्रारम्भ किया। इसने संगीत पर प्रतिबन्ध लगा दिया।

🔹औरंगजेब ने मोहत्सिव नामक एक अधिकारी की नियुक्ति किया। जो यह देखता था कि लोग शरीयत (इस्लाम) के अनुसार जी रहे हैं या नहीं।

🔹उत्तर मुगल काल में मो० शाह ने जजिया कर को पूर्णतः समाप्त कर दिया।
🔹शाह आलम-II ने इलाहबाद की संधि के तहत बिहार, बंगाल तथा उड़िसा की दिवानी अंग्रेजों को दे दी।

💠 मुगल प्रशासन एक केन्द्रीय प्रशासन था, इसमें नौकरशाही द्वारा पूर्ण नियंत्रण था।

1. वकील-ए-मुतलक  -  राजा के बाद सबसे महत्त्वपूर्ण पद

2. वजीर.              -         वित्त विभाग

3. मीर-बख्शी.       -           सेना- विभाग

4. मीर-आतिश.      -           तोप- खाना

5. काजी-उल- कुजाल.    -       न्याय विभाग

6.सद्र-उस-सूदूर.            -        धार्मिक मामला

7.मुहतसिव       -       शरीयत तथा नैतिक मूल्यों की जांच

🔹अकबर के समय प्रान्त (सूवा) की संख्या 15 थी जबकि औरंगजेब के समय सूत्रा की संख्या 20 थी। सूबे का प्रशासन सूबेदार के पास था।

💠   मुगलकालीन स्थापत्य कला

🔹भवन, मकबरा तथा बाग बगिचे के निर्माण की विभिन्न शैलियों को स्थपत्य या वस्तुकला कहते हैं। 
🔹मुगल वस्तुकला का प्रारम्भ बाबर के समय से ही चालू हो गया। बाबर को चार बाग शैली का जनक माना जाता है। चारबाग शैली में बाबर ने आगरा में अराम बाग का निर्माण करवाया।

🔹बाबर ने बाग बगिचे के सिंचाई के लिए नहरों का प्रयोग करता था बाबर ने अयोध्या में बाबरी मस्जिद का निर्माण करवाया था।

🔹हुमायुं ने दिल्ली में दिन पनाह नामक लाइबरेरी का निर्माण करवाया, जबकि हूमाय की बहन गुलबदन बेगम ने दिल्ली में हुमायुं का मकबरा बनवाया। इसे लाल ताजमहल के नाम से जाना जाता है।

🔹अकबर ने फतेहपुर सिकरी में बुलन्द दरवाजा का निर्माण करवाया। 
🔹जहांगीर के समय नूरजहां ने एतमाद्दौला का मकबरा बनवाया तथा काश्मीर में शालीमार बाग का निर्माण करवाया। (जहांगीर के काल को स्थापत्य का विश्राम काल कहते हैं।) 
Remark: सफेद वेदाग संगमरमर तथा इटली की पिएट्रा-डोरा शैली का प्रथम प्रयोग इसी मकबरा निर्माण में हुआ था।
Remark : मुगलकालीन स्थापत्य कला में गोलगुम्बद से मुक्त भवनों का निर्माण हुआ।
🔹 शाहजहां स्थापत्य कला में अधिक रुचि लेता था। इसके काल को स्थापत्य कला का स्वर्ण काल कहते हैं। स्थापत्य के कारण ही शाहजहां के काल को मुगल का स्वर्ण युग कहते हैं। इसने दिल्ली में जमा मस्जिद तथा लाल किला का निर्माण करवाया।

🔹 शाहजहां ने आगरा में ताजमहल का निर्माण कराया तथा लाहौर में शिशमहल का निर्माण कराया। ताजमहल भारत का सबसे बड़ा मकबरा है।

🔹 पिएट्रा-डोरी शैली का प्रयोग ताजमहल में भी हुआ है।

Remark: आगरा के किला के अंदर स्थित मोती मस्जिद का निर्माण शाहजहां ने करवाया, जबकि दिल्ली में लाल किला में स्थित मोति मस्जिद का निर्माण औरंगजेब ने करवाया।

🔹औरंगजेब ने औरंगाबाद में बीबी का मकबरा बनवाया। जिसे ताजमहल का घटिया नकल कहते हैं। अंतिम मुगल बादशाह बहादुर शाह (जफर-II) ने दिल्ली में अपना मकबरा बनवाया था किन्तु अंग्रेज ने उसे पकड़कर उसे निष्कासित कर दिया। इस प्रकार उसका मकबरा खाली रह गया।

💠               मुगलकालीन चित्रकला

🔹मुगल चित्रकारी पर फारसी शैली की अधिकता थी। मुगलकालिन चित्रकला बाबर के समय प्रारम्भ थी। बाबर के दरवारों में बेहजाद नामक चित्रकार से जिनहें पूरब का राफेल कहा जाता है।

Remark: राफेल एक यूरोपिय चित्रकार था जिसने पुनर्जागरण में महत्वपूर्ण भूमिका निभया ।
🔹हुमायुं के दरबार में मीर सय्यद अली तथा अब्दुल सानद नामक चित्रकार थे। 
🔹अकबर के बगल में केशव लाल, लगन बसावन तथा दशक्त नामक प्रसिद्ध चित्रकार थे। दशवन्त इन सब में सबसे प्रमुख चित्रकार था। जिसकी सबसे प्रमुख चित्रकारी खानदान-ए-तैमुरिया है।

🔹जहांगीर के काल को चित्रकला का स्वर्ण काल कहा जाता था। जहांगीर कहता था कि यदि किसी चित्र की कई लोगों ने मिलकर बनाया हो तो मैं बड़े आसानी से यह बता सकता हूँ कि उस चित्र का कौन सा भाग किसने बनाया है। इसके दरबार में विसबन दास मोहर तथा मेन्सर नामक चित्रकार थे। जहांगीर के काल में फारसी शैली के स्थान पर भारतीय शैली का प्रभाव था। जहांगीर के काल में मुगल चित्रकला की वास्तविक आत्मा लुप्त हो गई।

🔹 शाहजहां के काल में स्थापत्य कला का अधिक विकास हुआ।
🔹 शाहजहां के समय चित्रकला का विकास कम हुआ।

🔹औरंगजेब ने चित्रकला पर यह कहकर प्रतिबन्ध लगा दिया कि चित्रकला इस्लाम के बिलाफह है। साथ ही उसने सिकन्दर में स्थित अकबर के मकबरा से चित्रकला को मिटवा दिया।

💠                मुगलकालीन प्रमुख पुस्तक

1. बुजुक-ए-बाबरी         -                   बाबर

2. बाबर नामा.            -.     अब्दुल रहीम (खान-ए-खाना)

3.हुमायुनामा          -             गुलबदन बेगम (Sister)

4. अकबरनामा        -              अबुल फजल

5. तुजुक-ए-जहांगीरी      -    जहांगीर + मोतमिद खान

6.शाहजहांनामा.        -.    इनायत खान

7. तबकात ए अकबर   -   निजामुद्दीन अहमद (इस पुस्तक में दिल्ली सल्तनत से लेकर मुगल काल तक का इतिहास है।)

💠      मुगलकालीन फारसी में अनुवादित पुस्तक

1. महाभारत।        -        बदायूनी, अबुल फजल, फैजी

2. रामायण।       -           बदायूनी

3. आर्थवेद।        -           बदायूनी + हाजी इब्राहिम 

4. लीलावती         -          फैजी

5. नल-दमयंती      -          फैजी
जी
6. राजतरंगिणी      -          शाहमुहम्मद सहबादी

7. उपनिषद           -          दारा शिकोह

8. गीता                -          दारा शिकोह



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