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मराठा साम्राज्य (Maratha samrajya)

मराठा सम्राज्य

➡️ मराठों के पूर्वज राजस्थान के सिसोदिया वंश के सूर्यवंशी राजपूत थे।
➡️ महाराष्ट्र की भक्ति आंदोलन तथा औरंगजेब की कट्टर धार्मिक नीति मराठों के उदय का कारण बनी।
➡️ मराठा साम्राज्य की स्थापना शिवाजों ने किया। शिवाजी का जन्म 20 अप्रैल, 1627 को पुना के निकट शिवनेर नामक स्थान पर हुआ था।

➡️ इनके पिता शाहजी भोसले तथा माता जीजा बाई इनके गुरु कोण्ड देव थे। इनकी आध्यात्मिक गुरु रामदास थे। (शिवाजी की सौतेली माँ तुकाबाई थी)

➡️ शिवाजी के पिता (शाहजी भोंसले) पहले अहमदनगर के शासक के यहाँ नौकरी पर थे। जब अहमदनगर पर मुगलों का अधिकार हो गया तो शाहजी भोसले बीजापुर के शासक के यहाँ नौकरी करने लगे और अपनी अपेक्षित पत्नि जीजाबाई तथा पुत्र शिवाजी को पूना की जागीर सौंप दिया। 

➡️ शिवाजी के जीवन पर सर्वाधिक प्रभाव उनके माता जीजा बाई तथा गुरु कोण्ड देव का पड़ा। 
➡️ शिवाजी दक्षिण भारत में मुस्लिम शासन के स्थान पर हिन्दू साम्राज्य खड़ा करना चाहते थे।

➡️ शिवाजी की पहाड़ी चुहा के नाम से जाना जाता है। शिवाजी ने गुरील्ला पद्धति या छापामार पद्धति का प्रयोग अपनी युद्ध अभियान में किया। इस पद्धति में रुक-रुक कर तथा अचानक हमला किया जाता था।

➡️ शिवाजी ने गुरिल्ला पद्धति को अहमद नगर के शासन मलिक अम्बर से सीखा था। 

➡️ शिवाजी ने अपना प्रथम सैन्य अभियान 1613 ई. में विजापुर के विरुद्ध किया और तोरण का किला जीत लिया। शिवाजी जी ने पनहाला, कोल्हापुर व पुरंदर का किला भी जीत लिया।

➡️ शिवाजी ने विजापुर के सेनापति अफजल खां की हत्या कर दी।

➡️ 1657 में शिवाजी का मुलाकात औरंगजेब से हुयी। (शिवाजी, औरंगजेब से संधि करना चाहते थे किन्तु औरंगजेब ने स्वीकार नहीं किया। 
➡️ औरंगजेब ने शिवाजी को पराजित करने के लिए कई अभियान किये।

➡️ शिवाजी ने औरंगजेब के मामा साईस्ता खां को पराजित कर दिया।

➡️ 1664 ई. में शिवाजी ने सुरत को पहली बार लूटा।

Remark 🔎:सूरत मुगलों के समय बहुत बड़ा औद्योगिक केन्द्र था। सूरत को जब शिवाजी लूटा तो औरंगजेब शिवाजी के विरुद्ध एक बड़ा अभियान भेजा। इस अभियान का नेतृत्व राजा जय सिंह कर रहे थे। इस अभियान में शिवाजी पराजित हो गए।

➡️ शिवाजी तथा जय सिंह के बीच 05 June 1665 पुरन्दर की संधि हुई। पुरन्दर की संधि के तहत शिवाजी को जीते गए 35 किलों में से 23 किला मुगलों को लौटाना पड़ा। इस संधि के तहत शिवाजी ने अपने पुत्र संम्भाजी को औरंगजेब की सेवा में भेजा ओर खुद अगले वर्ष 1666 में औरंगजेब से मिलने आगरा पहुँचे। किन्तु औंगजेब ने धोखा से शिवाजी को जयपुरी महल ( आगरा) में कैद कर लिया। 

➡️  शिवाजी बहुत जल्द भेस बदलकर (1666 में) फलों की टोकरी में बैठकर जयपुरी महल से भाग गए।

➡️ 1670 ई. में शिवाजी ने सूरत को दुबारा लूटा।

➡️ 1674 ई. में शिवाजी ने रायगढ़ के किला में अपना राज्याभिषेक करवाया और छत्रपति के उपाधि धारण किया। शिवाजी का राज्याभिषेक गंगा भट्ट (विशेश्वर) नामक पण्डित ने करवाया गंगा भट्ट मूल रूप से काशी (बनारस) का रहने वाला था।

➡️  औरंगजेब कभी भी शिवाजी पराजित नहीं कर सका अन्त में 1679 ई. में औरंगजेब ने पुन: जजीया कर लगा दिया। 
➡️ जजीया कर का विरोध करने वाला एक मात्र शासक शिवाजी थे। (विवश होकर औरंगजेब ने शिवाजी को राजा की उपाधि दिया।

➡️ शिवाजी का अंतिम सैन्य अभियान कर्नाटक के विरुद्ध (1677) था।

➡️ 12 अप्रैल, 1680 ई. को शिवाजी की मृत्य हो गयी।

                 
                     शिवाजी के उत्तराधिकारी

    १.शम्भाजी                              २.  राजाराम
           ⬇️                                          ⬇️
        शाहूजी।                                  शिवाजी-II

➡️  शिवाजी के मृत्यु के बाद शम्भाजी जो पनहाला के किला में कैद थे वे वहाँ से भागकर मराठा सम्राज्य के छत्रपति बने।

➡️  1686 ई. में शम्भाजी ने औरंगजेब के विद्रोही पुत्र अकबर-II को शरण दे दिए जिस कारण औरंगजेब ने शम्भाजी को यातना देकर मार दिया और उनके पुत्र शाहू जी को बन्दी बना लिया। 
➡️ शम्भाजी के बाद राजा राम शासक बना किन्तु 1700 ई. में ये राजा राम की मृत्यु हो गयी।

➡️ राजा राम की पत्नी तारा बाई ने अपने अल्पायु पुत्र शिवाजी-II को शासक बना दिया और खुद उसकी संगरक्षक बन गयी। 
➡️ शाहूजी जो मुगल दरबार में कैद था (शम्भाजी का पुत्र) को बहादुर शाह ने मराठा शक्ति को कमजोर करने के लिए छोड़ दिया। शाहूजी ने शिवाजी-II को पराजित करके छत्रपति (शासक) बन गया।
                      किन्तु 1749 में शाहजी की मृत्यु हो गयी। इनके मृत्यु के बाद मराठा प्रशासन की सारी शक्तियों पेशवा के हाथ में आ गयी।

💠              पेशवा का काल [1713-1818]

 पेशवा वंशानुगत था, इसका निवास पुणे था।

 💠              बालाजी विश्वनाथ (1713 - 20 )

,➡️ इन्हें पेशवा शहू जी ने बनाया इन्हीं के सहयोग से शाहूजी छत्रपति बने थे शाहूजी ने इन्हें अपना प्रतिनिधी बनाकर मुगल शासक फरुखशियर के दरबार में भेजा (1717) था। फरुखशियर ने छत्रपति के पद को मान्यता दे दिया। इस संधि को मराठा शासन का Magnakarta कहा जाता है।

➡️ 1720 ई० में बालाजी विश्वनाथ की मृत्यु हो गयी। 

💠  बाजीराव प्रथम : यह बालाजी विश्वनाथ के पुत्र थे इन्हें लड़ाकू पेशवा भी कहा जाता है। 
 ➡️ शिवाजी के बाद गुरिल्ला पद्धति का सर्वाधिक प्रयोग बाजीराव प्रथम ने किया। बाजीराव प्रथम ने 1728 ई. में हैदराबाद के शासक निजाम-उल-मुल्क को हराकर उनसे मुंशी शिवगाँव की संधि किया।

➡️  बाजीराव प्रथम ने छत्रपति शाहू से कहे कि आओ इस पुराने वृक्ष के जड़ों पर वार करे शाखाएं तो स्वयं गिर पड़ेंगे। इस पर शाहूजी ने यह प्रतिक्रया दिया कि आप नि:संदेह ही एक योग्य पिता के एक योग्य पुत्र हैं। आपके प्रयासो से मराठा साम्राज्य का पत्ताखा कटक से अटक तक लहराए जाएंगे।

,➡️ बाजीराव प्रथम ने 1737 में मात्र 500 घोड़सवार लेकर मुगल शासक मो० शाह पर आक्रमण कर दिया और दिल्ली को पूरी तरह लूटा और मो. शाह से एक संधि की जिसके तहत 5 लाख प्रति वर्ष लेकर विदेशी आक्रमण के समय सैन्य मदद देने का वचन दिया।

➡️  1739 में ईरान तथा एशिया का नेपोलियन कहा जाने वाला नादिर शाह ने दिल्ली पर आक्रमण कर दिया किन्तु बाजीराव ने कोई भी सैन्य मदद नहीं दिया। 
➡️ बाजीराव ने पुर्तगालियों से सालसेट तथा बसीन (महल) छीन लिया। बाजीराव हिन्दू पद पादशाही की स्थापना करना चाहते थे।

➡️ बाजीराव का सम्बन्ध मस्तानी नामक एक मुस्लिम महिला से था।

➡️  शाहू जी बाजीराव-I के समय ही पूरे मराठा साम्राज्य को पांच परिसंघ में बांटा था

(i) बड़ौदा।              -.   गायकवाड़ (प्रशासक)

(ii) पुना.                -     पेशवा

(iii) नागपुर            -      भोसले

(iv) इन्दौर.            -      होल्कर

(v) ग्वालियर.       -        सिंधिया


💠         बालाजी बाजीराव [1740-61]

➡️ बालाजी बाजीराव को नाना साहब के नाम से भी जाना जाता है। इनके समय मराठा साम्राज्य का सर्वाधिक विस्तार हुआ। यही कारण है कि बालाजी बाजीराव को शिवाजी के बाद मराठा का दुसरा संस्थापक कहा जाता है। 

➡️ 1749 ई. में छत्रपति शाहूजी मृत्यु हो गयी और संगोली के संधि के तहत छत्रपति के पद को समाप्त कर दिया गया और मराठा सम्राज्य पूरी तरह पेशवा के अधिन हो गया।
➡️  1752 ई. में झलकी की संधि के द्वारा हैदराबाद के निजाम ने मराठों की अधीनता स्वीकार कर लिया।
 ➡️  14 Jan 1761 को अफगान सेनापति अहमद शाह अब्दली ने मराठों के साथ पानीपत का III युद्ध किया। इस युद्ध में मराठा बुरी तहर पराजित हो गए। मराठों को पराजय को खबर सुनकर पेशवा बालाजी बाजीराव को मृत्यु हो गयी। इतिहासकार सिडनी ओपेन ने कहा है कि पानीपत का III युद्ध यह सिद्ध नहीं कर सका कि भारत में किसका शासन होगा लेकिन यह जरुर सिद्ध कर दिया कि भारत में किसका शासन नहीं होगा।

💠            माधव नारायण राव [1761-72]

➡️ इसके समय मराठा साम्राज्य की खोई शक्तियां दुबारा मिलने लगी। यह एक योग्य पेशवा था इसने मुगल शासक शाह आल-II को दुबारा मुगल गद्दी पर बैठाया जो कि अहमद शाह अब्दाली के डर से दिल्ली छोड़कर भाग गया था किन्तु इसी वर्ष माधव नारायण की मृत्यु हो गयी।

➡️ नारायण राव :  इसका कार्यकाल बहुत छोटा था। इनका चाचा रघुनाथ ने इसकी हत्या कर दी।
 
💠            माधव राव-II [1773-95]

➡️ यह अल्पायु था। अत: इसे सहायता देने के लिए बारभाई परिषद का गठन किया गया। यह परिषद 12 मंत्रीयों का एक समूह था। इसमें सबसे प्रमुख नाना कडनवीस तथा महादजी सिंधिया थे। 

➡️ रघुनाथ राव (रघोवा) ने खुद पेशवा बनने के लिए अंग्रेजों के साथ 1775 ई. में सूरत की संधी कर ली और अंग्रेजों को उपहार में वसीन तथा सालसेट दे दिया किन्तु बाद में अंग्रेज अपने वादे से मुकर गये। अंग्रेजों तथा मराठों के बीच यही तनाव आंग्ल मराठा युद्ध का रूप लिया और 3 आंग्ल मराठा युद्ध हुआ। 


          प्रथम आंग्ल मराठा युद्ध [1778-82]

🔹 यह युद्ध महादजी सिंधिया के अध्यक्षता में सालाबाई के संधि के तहत समाप्त हुआ। इस संधि के तहत अंग्रेजों ने बारभाई परिषद को मान्यता दिया तथा माधव नारायण-II को पेशवा स्वीकार किया।
🔹1795 ई. में महादजी सिधिया तथा माधव नारायण-II की मृत्यु हो गयी और अगला पेशवा बाजीराव-II बना।

💠             बाजीराव-II [1795-1818]

➡️ यह अंतिम पेशवा था। इसके समय II आंग्ल मराठा युद्ध हुआ। इस पेशवा ने अंग्रेजों की अधीनता स्वीकार कर ली।

             द्वितीय आंग्ल मराठा युद्ध [1803-1806]

🔹यह युद्ध वसीन की संधि के तहत समाप्त हुआ। इस संधि के तहत पेशवा बाजीराव द्वितीय ने अंग्रेजों की अधीनता स्वीकार कर ली।
🔹इस संधि को भोसले होल्कर तथा सिंधिया ने स्वीकार नहीं किया और यह III आंग्ल मराठा युद्ध का कारण बना।

          तृतीय आंग्ल मराठा युद्ध [1817-1818]

🔹 यह युद्ध पूणे की संधि के तहत समाप्त हुआ और इस युद्ध के समाप्ती के बाद पेशवा बाजीराव-II को अंग्रेजों ने पेंशन भोगी बना दिया गया और उसे कानपुर (बिठुर) भेज दिया।

🔹 इसी पेशवा बाजीरव-II का दत्तक पुत्र (गोद लिया हुआ) नाना साहब  था। बाजीराव-II के बाद इसे भी पेंशन दिया जा रहा था। किन्तु लॉर्ड डलहौजी ने उनका पेंशन बन्द कर दिया। यही कारण था कि नाना साहब 1857 के विद्रोह में भाग लिये।

 🔎: तृतीय आंग्ल मराठा युद्ध के बाद हुई संधीयां

    क्षेत्र                        प्रशासक             सन्धि

(1) पुना।                     पेशवा            पुना की सन्धि

(2) नागपुर                  भोंसले            नागपुर की सन्धि

(3) इन्दौर।                  होल्कर           मंदसौर की सन्धि

(4) ग्वालियर।              सिंधिया        ग्वालियार की सन्धि


 ➡️बड़ौदा का गायकवार के साथ कोई संधि नहीं की गयी क्योंकि यह तृतीय आंग्ल महाठा युद्ध में शामिल नहीं था। इसने स्वतः ही अंग्रेजों की अधिनता स्वीकार कर ली।

➡️ 1818 आते-आते मराठा शक्ति समाप्त हो गयी और मराठा क्षेत्र पर अंग्रेजों का अधिकार हो गया।

➡️ पिण्डारी यह मराठा के छोटी टुकड़ी थी यह जंगलों में रहती थी तथा छापामार युद्ध (गुरिल्ला युद्ध) करके अंग्रेजों से लड़ती थी। मेल्कम ग्रे नामक इतिहासकार ने पिण्डारियों को मराठों का कुत्ता कहा है।

➡️ लाई हेस्टिंग्स ने पिण्डारीयों का अन्त कर दिया।


💠                 मराठा सैन्य व्यवस्था

➡️ मराठों का मुगलों से संघर्ष शाहजहां के काल से ही प्रारम्भ हो गया था। 
➡️ मराठों के पास 250 किला था। जिसमें से 23 किला को शिवाजी ने पुरन्दर की संधि के तहत मुगलों को दे दिया।

➡️ शिवाजी ने पुर्तगालियों से लगभग 200 तोप खरीदे थे। शिवाजी ने कर्नाटक के कोलावा में नौसेना का गठन किया था।
➡️  मराठा सैनिकों को धार्मिक स्थल, बच्चे, महिला तथा आम नागरिकों पर आक्रमण पर निषेध था।

➡️ शिवाजी के घोड़सवारों को दो भागों में बांटा जाता है

       1. बरगीर यह स्थायी घोड़सवार थे और नियमित रूप             से सेना में रहते थे। 
        2. सिलहदार यह अस्थायी घोड़सवार थे। यह युद्ध               के समय सेना में रहते थे।

➡️ पैदल सैनिक = पागा

💠                 मराठा प्रशासन व्यवस्था

➡️  मराठा प्रशासन की सुरुआत शिवाजी ने की। उन्होंने प्रशासन के लिए 8 मंत्रीयों की नियुक्ति किया जिन्हें संयुक्त रूप से अष्ट प्रधान कहा जाता था। 
➡️ मराठा प्रशासन में सबसे बड़ा पद छत्रपति का था उसके बाद पेशवा का पद था। 


    💠                   अष्ट प्रधान

➡️ पेशवा : यह छत्रपति के बाद सबसे महत्त्वपूर्ण पद था इसका कार्य छत्रपति की अनुपस्थिति में प्रशासन की देख रेख करना। 
➡️ मजुमदार / अमात्य :   यह वित्त मंत्री का पद था जो राजस्व का लेखा जोखा रखता था।

➡️ सरी-ए-नौबत : यह सेनापति का पद था।

➡️ सुमत्त: यह विदेश मंत्री का पद था इसका कार्य विदेशी राज्यों से तालमेल बनाना था। 
➡️ वाक्यानवीस : यह सूचना गुप्तचर तथा संधि करने वाला मंत्री था।

➡️ पिटनिस :  इसका कार्य पत्राचार व्यवस्था को देखना था।

➡️ पण्डित राव : इसका कार्य धार्मिक मामलों की देख-रेख करना था।
➡️ न्यायाधीश:  इसका कार्य न्याय व्यवस्था की देख-रेख करना ।

💠                 मराठा राजस्व व्यवस्था

➡️ मराठों की कोई व्यवस्थित राजस्व व्यवस्था नहीं थी। ➡️ शिवाजी का राजस्व व्यवस्था मलिक अम्बर के राजस्व व्यवस्थ से ली गयी थी। शिवाजी के समय राजस्व का सबसे बड़ा स्त्रोत कृषि कर था (भूमिकर) । 
➡️ शिवाजी ने भूमिकर को 33% से बढ़ाकर 40% कर दिया। 

➡️ शिवाजी के समय सबसे महत्त्वपूर्ण कर चौथ तथा सरदेश मुखी था।
 🔹चौथ यह शिवाजी अपने पड़ोसी देश से लेते थे। यह           कुल कृषि का 1/4 भाग था।

🔹सरदेश मुखी शिवाजी यह कर अपने ही देश का
    जनता से लेते थे। इस कर को देने वाला इस बात को          स्वीकार करता था कि उसके देश के प्रमुख शिवाजी ही हैं। 
➡️ यह कर कुल कृषि के 1 / 10 भाग पर था।

➡️ मराठा सम्राज्य की सबसे छोटी इकाई गांव था जिसका प्रधान पटेल होता था।
➡️ मराठा साम्राज्य की राजभाषा मराठी थी।

 

                                 🔵










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