1. ब्रह्म समाज (1828) :इसके संस्थापक राजाराम मोहन राय थे। इन्हें राजा की उपाधि अकबर द्वितीय ने दिया था। ये हिन्दू धर्म के कुप्रथाओं के विरूद्ध आवाज उठाये जिस कारण उन्हें भारतीय पुर्नरजागरण (सुधार) तथा आधुनिक भारत का अगदूत कहा जाता है। सुभाष चंद्र बोस ने इन्हें युग दूत कहा है। इन्होंने 1817 में हिन्दू कॉलेज की स्थापना किया। 1829 ई. में विलियम बैटिक के सहयोग से इन्होंने सती प्रथा का अंत कर दिया। डेविड हेयर इनके प्रमुख सहयोगी थे। इन्हें फारसी बंगाली, अंग्रेजी तथा उर्दू का अच्छा ज्ञान था। इन्होंने सर्वाधिक पत्रिका फारसी भाषा में लिखा मिरातुल अखबार फारसी में तथा संवाद कैमुदी बंगाली में छपने वाले इनकी प्रमुख पत्रिकाएं थी।
1833 ई. में लंदन में मेनिनजाइटिस के कारण इनकी मृत्यु हो गई। इनके दो प्रमुख शिष्य देवेन्द्र नाथ टैगोर तथा केशवचन्द्र सेन थे। इनके मृत्यु के बाद ब्रह्मसमाज की बागडोर देवेन्द्र नाथ टैगोर के हाथ में आ गई। देवेन्द्र नाथ टैगोर तथा केशव चन्द्र के बीच मतभेद हो गया। जिस कारण इन दोनों ने ही ब्रह्म समाज को छोड़ दिया देवेन्द्र नाथ टैगोर ने 1865 ई. में भारतीय आदी ब्रह्म समाज की स्थापना की। जबकि 1867 में केश्वचन्द्र सेन ने वेद समाज की स्थापना कर दी।
2. आर्य समाज - इसके संस्थापक दयानंद सरस्वती थे। इन्होंने आर्य समाज 1875 ई. में मुम्बई में किया और 1877 ई. में इसकी शाखा लाहौर में खोली। आर्यसमाज का नारा था। भारत भारतीयों के लिए है। जबकि दयानंद सरस्वती का नारा था। वेदों की और लौटो । दयानंद सरस्वती का जन्म गुजरात में 1834 ई. में हुआ था। इनका नाम मूल शंकर था। इनके गुरु विरजानंद थे। दयानंद ने सती प्रथा, बाल विवाह, पर्दा प्रथा का विरोध किया। किन्तु महिला शिक्षा तथा विधवा पुर्नविवाह का समर्थन किया। इनके मृत्यु के बाद 1886 में इनके शिष्य हंस राज ने DAV (दयानंद एंग्लो वैदिक कॉलेज) की स्थापना किया जो भारत के लगभग सभी जिलों में फैल चुका है।
3. राम कृष्ण मिशन - इसके संस्थापक स्वामी विवेकानंद थे। इन्होंने अपने गुरु रामकृष्ण के नाम पर इसका नामकरण किया। विवेकानंद का जन्म 12 Jan, 1863 को हुआ। इनका नाम नरेन्द्र दत्त था। रामकृष्ण परमहंस ने इन्हें हिन्दू धर्म की शिक्षा दी थी। 1887 ई. में इन्होंने कलकत्ता में बेलुरमढ़ की स्थापना की। 1893 ई. में इन्होंने ऐतिहासिक शिकागो धर्म सम्मेलन में भाग लिए।
इन्होंने अमेरिका के न्यूयार्क में वेदान्त सोसायटी की स्थापना 1896 में कर दिया। 1897 में इन्होंने बेलुरमठ को रामकृष्ण मिशन का अंतर्राष्ट्रीय मुख्यालय बना दिया। 1902 में इनकी मृत्यु हो गई। इन्हें हिन्दू नेपोलियन या तुफानी हिन्दू कहते हैं। सुभाषचन्द्र बोस ने इन्हें भारत का अध्यात्मिक गुरु कहा।
4. थियोसोफिकल सोसायटी (1875) - इसकी स्थापना मैडम ब्लावाटस्की तथा कर्नल आलकाट ने कनाडा में किया। यह संस्था विभिन्न देशों में संस्कृति तथा शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए कार्यरत थी। 1886 में इसकी एक शाखा मद्रास के अडियार में खोली गई जो आगे चलकर इस संस्था का मुख्यालय बन गया। इसी शाखा की एक सदस्य बनकर आयरलैण्ड की महिला एनी बेसेंट भारत आयी। इन्होंने आयरलैण्ड की भांति भारत में भी होमरूल आंदोलन प्रारंभ करना चाहती थी। किन्तु भारत में यह सफल नहीं हो पाया।
5. यंग बंग आंदोलन- इसे हेनरी विलियम डेरिजीवो ने 1828 में प्रारंभ किया यह बंगाल के युवाओं का आंदोलन था। ये भारतीय प्रेस की स्वत्रंता की मांग करते थे।
मुस्लिम सुधार आंदोलन
1. वहावी आंदोलन - इसका प्रारंभ वरेली से हुआ किन्तु पटना इसका केन्द्र बन गया। यह पश्चिमी संस्कृति का विरोध करते थे। इसके संस्थापक सैयद अहमदबरेली थे। यह सबसे संगठित आंदोलन था।
2. अलीगढ़ आंदोलन - इसका प्रारंभ अलीगढ़ से हुआ इसका उद्देश्य मुसलमानों को उच्च शिक्षा देना था इसके संस्थापक सरसैयद अहमद खान ने 1875 ई. में अलीगढ़ एंग्लो ओरिएण्टल कॉलेज की स्थापना किया जो 1920 ई. में अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय का रूप ले लिया। सर सैयद अहमद खां ने Petriotic Association की स्थापना किये थे।
3. अहमदिया आंदोलन- इसका प्रारंभ गुरुदासपुर से हुआ ये हिन्दू-मुस्लिम में एकता लाना चाहते थे। इसके संस्थापक मिर्जा अहमद ने खुद को कृष्ण का अवतार घोषित कर दिया जिस कारण हिन्दू और मुस्लिम दोनों ही इस संस्था से हट जाए।
4. देववंद आंदोलन - यह उत्तर प्रदेश के सहारणपुर से प्रारंभ हुआ। यह पश्चिमी संस्कृती का विरोध करता था। तथा इस्लामिक संस्कृती शिक्षा को बढ़ावा देता है। इसके संस्थापक काशीमनौ नग्बी तथा अहमद गंगोई थे।
जनजातीय आंदोलन |
1. सन्यासी विद्रोह - यह बंगाल से प्रारंभ हुआ। अंग्रेजों ने आकाल पड़ने के बाद भी Tax में कोई कमी नहीं किया जिस कारण सन्यासियों ने विद्रोह कर दिया। इस विद्रोह को वारेंग हेस्टिंगस ने दबा दिया। इसकी चर्चा बंकिम चंद्र चटर्जी की पुस्तक आनंदमठ में है।
2. संथाली विद्रोह - यह झारखण्ड के राजमहल के पहाड़ी से शुरू हुआ यह जमिंदारों के विरुद्ध था। इसका नेतृत्व सिधु कान्हु ने किया। 1856 आते-आते यह विद्रोह समाप्त हो गया।
3. अहोम विद्रोह-यह असम ने प्रारंभ हुआ इसका नेतृत्व 1828 ई. में गोमघर कुंवर ने किया।
4. पागलपंथी विद्रोह-यह बंगाल के क्षेत्र से हुआ इसकी शुरूआत 1825 में कर्णसाह ने किया। बाद में इसका नेतृत्व उनके पुत्र टिपू ने किया।
5. फरायसी विद्रोह- इसकी शुरूआत बंगाल में शरीदुल्ला तथा दादु मिया ने किया। 6. खासी विद्रोह - यह मेघालय में खासी पहाड़ी से 1833 में प्रारंभ हुआ इसका नेतृत्व तिरथ सिंह ने किया।
7. रामोसी विद्रोह-यह महाराष्ट्र के पश्चिमी घाट से शुरू हुआ इसका नेतृत्व चित्रा सिंह ने किया। यह किसानों का
विद्रोह था।
8. कुका विद्रोह - यह पंजाब के क्षेत्र से शुरू हुआ इसका नेतृत्व भगत जवाहर मल ने किया।
9. मुंडा विद्रोह - यह झारखण्ड का जनजाति विद्रोह था जो मुण्डा जनजातियों ने किया था। इसका नेतृत्व विरसा मुण्डा ने किया। विरसा मुण्डा का जन्म 15 Nov. 1874 ई. को हुआ। इसी लिए झारखण्ड की स्थापना 15 Nov. को की गई।
10. ताना भगत आंदोलन - यह झारखण्ड से प्रारंभ हुआ इसका नेतृत्व जतारा सिंह ने किया। |
किसान विद्रोह
अंग्रेजों ने भारतीय किसानों का शोषण बहुत बड़े पैमाने पर करने लगे थे जिस कारण भारतीय किसान अत्यधिक गरीब हो गया और उसने भारत के विभिन्न क्षेत्रों से विद्रोह प्रारंभ कर दिया।
1. नील विद्रोह (1859 60) - यह बंगाल के नदियां जिला से प्रारंभ हुआ किसानों का आंदोलन था। इसका नेतृत्व दिगम्बर विश्वास तथा विष्णु विश्वास ने किया था। इसकी चर्चा दिग्बंधु मित्र की रचना नील दर्पण तथा हरिश्चन्द्र मुखर्जी की पुस्तक हिन्दू Patriotic में है।
2. चम्पारण सत्याग्रह (1917) - यह बिहार के चम्पारण से प्रारंभ हुआ इसका नेतृत्व महात्मा गांधी ने किया। यह निलहे जमिंदारों के विरुद्ध एक आंदोलन था। ये जमींदार तीन कठिया पद्धति के तहत 20 कट्ठा खेत में जबरदस्ती 3 कट्ठे पर नील की खेती करवाते थे। एक बार नील बोने पर तीन साल के लिए खेत बंजर हो जाती है। महात्मा गांधी ने इस पद्धति को समाप्त करवा दिया।
3. खेड़ा सत्याग्रह (1918)- इसे गुजरात के खेड़ा से महात्मा गांधी ने प्रारंभ किया। अंग्रेज खेड़ा में आकाल पड़ने के बाद भी टेक्स वसुल कर रहे थे इसे महात्मा गांधी ने माफ करवा दिया।
4. अवध किसान सभा (1920) - इसे रामचन्द्र ने प्रारंभ किया यह किसानों का एक संगठन था। 5. मोपला आंदोलन (192022) - यह केरल (मालावार) तट के किसानों का एक आंदोलन था जिसका नेतृत्व अल्ली मुलसियर ने किया।
6. बारदोली सत्याग्रह (1927) - यह गुजरात के वारदोली से आकाल के दौरान टेक्स बसुलने के विरुद्ध एक आंदोलन था जिसका नेतृत्व बल्लभ भाई पटेल ने किया। इस आंदोलन की सफलता के बाद बारदोली की महिलाओं ने गांधी जी के माध्यम से बल्लभ भाई को सरदार की उपाधि दिया।
7. बिहार किसान सभा (1929)- यह बिहार के किसानों का एक संगठन था जिसका नेतृत्व स्वामी सहजानंद ने किया।
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History (इतिहास)