रक्त (Blood)
👉 रक्त एक प्राकृतिक कोलाइड (गाढा) है।
👉रक्त एक संयोजी उत्तक है। इसका pH मान 7.4 होता है अर्थात रक्त क्षारीय होता है। स्वस्थ मानव 5*1/2 लीटर रक्त अर्थात् उसके कुल भार का 7% होता है।
👉महिलाओं में पुरुष की अपेक्षा आधा लीटर कम blood होता है।
👉 रक्त विभिन्न पोषक पदार्थ तथा गैसों का परिवहन करता है।
👉रक्त परिसंचरण की खोज विलियम हार्वे ने किया।
👉रक्त में कोलेस्ट्रॉल का सामान्य स्तर 180 से 200 gun होता है।
👉रक्त का निर्माण कुल भ्रूण (बच्चा) अवस्था में मीसोडर्म में होता है। वयस्क मानव रक्त का निर्माण अस्थिमज्जा मे होता है। रक्त पलीहा या तिल्ली (Spleen) में जमा रहता है अर्थात् Spleen को Blood Bank कहा जाता है।
Blood
प्लाज्मा रुधीराणु(रक्त कण)
(55-60%) (40-45%)
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१.फैबिरनोजेन १. RBC (इरिथ्रोसाइट)
२. प्रोथरोम्बिन २.WBC ( ल्यूकोसाइट)
३.plate lets (थम्ब्रो साइट)
रक्त प्लाज्मा
यह रक्त का एक महत्वपूर्ण भाग है इसका 90% भाग जल होता है और 10% भाग में प्रोटीन तथा कार्बोहाईट होते हैं। प्लान्मा में पाये जाने वाला प्रोटीन फ्राइब्रिनोजेन तथा प्रोप्रोम्बन होता है। यह दोनों प्रोटीन रक्तको कामनाने जमाने में मदद करते
सेरम (Serium)
जब रक्तात्मा में से फाइब्रिनोजेन नामक प्रोटीन निकाल लेते हैं तो बचा हुआ रक्त हो सेरम कहलाता है। सरम हल्के पीले रंग का होता है, बीमारियों की जाँच मरण से की जाती है।
रुधीकीम(Corpuscle)
👉यह रक्त का कणिकीय भाग होता है। इसे तीन भागों में बांटते हैं।
1. R.B.C. | Real Blood Corpuscle] लाल रक्त कणिका
👉रुधीराणु का 99% भाग R.B.C. होता है RBC की कुल 5 मिलियन (50 लाख) होती है।
👉RBC में केन्द्रक तथा लाइसोसोम नहीं पाता है।
👉RBC को एरिथ्रोसाइट भी कहते हैं। RBC का जीवन काल 120 दिन होता है। इसका निर्माण अस्थि मजा में होता है भ्रूणवस्था में इसका निर्माण यकृत (Liver) में होता है। खराब हुयी RBC Spleen तथा यकृत में जाकर नष्ट हो जाती है। Spleen को RBC का कब्र या Grave yard कहते हैं। RBC का आकार गोल होता है।
👉RBC का मुख्य कार्य ऑक्सीजन तथा CO2 का परिवहन करता है।
👉RBC में हीमोग्लोबिन पाया जाता है और हीमोग्लोबिन (Hb) के ही कारण रक्त का रंग लाल होता है।
👉 हीमोग्लोबिन में लोहा (Iron) पाया जाता है।
👉हीमोग्लोबिन ऑक्सीजन तथा CO का परिवहन करता है।
👉पुरुष (Male) में डोमोग्लोबिन का स्तर 149m प्रति 100 M1. होता है।
👉Fernale (महिला) में होमोग्लोबिन का स्तर 139m प्रति 100 ML. होता है।
Remark: हीमोग्लोबिन के कमी के कारण एनीमिया (अरक्तात) नामक रोग होता है।)
2.W.B.C. [White Blood Corpuscle) श्वेत रक्त कणिका
👉इनकी संख्या 8000 से 10000 के बीच होती है। इनमें केन्द्रक होता है। इसमें हमोग्लोबिन नहीं होता है। जिस कारण यह सफेद रंग की दिखती है।
👉WBC का आकार अनियमित होता है। WBC का निर्माण अस्थिमज्जा मे होता है। इसका जीवनकाल 4 दिन होता है।
👉RBC : WBC=600:1
👉WBC को ल्यूकोसाइट भी कहते हैं।
👉WBC हमें संक्रमण (बिमारी) से बचाता है अभ्यंत रोगों से हमारी रक्षा करता है।
👉WBC कई प्रकार होता होता हैसात
1. Eosino-phil
2 Baso Phil
3.Neutro - Phil
4. Mono Cyic सबसे बड़ा
5. Lyimpha Cyte Antibody का निर्माण तथा जीवाणुओं को नष्ट करना।
👉Mono Cyte आकार में सबसे बड़ा होता है।
👉Lympho- Cyte Antibody का निर्माण करता है जो हमारे शरीर में प्रतिरक्षक कहलाती है।
👉Lympho-Cyte में Cell And BCell पायी जाती है। बीमारियों में मुख्य रूप से रक्षा (प्रतिरक्षा) टी सेल करता है। HIV में टी- मेल नष्ट हो जाता है।
Plate lets (बिम्बाणु)
इसे थम्बोसाइट भी कहते हैं। यह रक्त कोक्का बनाने में मदद करता है अर्थात यह रक्त के बहाव को रोकता है। यह रंगोन होता है। इसका जीवनकाल 4-5 दिन होता है। प्रति घनमीटर में इसको संख्या 2 से 3 लाख है। डेंगू बीमारी में इसकी संख्या 80,000 से भी कम हो जाती है।
रक्त का कार्य
👉रक्त पर्व भोज्य पदार्थ परिवहन करता है।।
👉हार्मोन CO2, O2 का परिवहन करता है।
👉 रक्त उत्सर्जित पदार्थों का निष्कासन करता है।
👉 रक्त तापमान को नियंत्रित करता है। यही कारण है कि मलेरिया बुखार Spleen प्रभावित होने के कारण शरीर का तापमान गिर जाता है।
👉 लसिका (Lymph)
यह हल्के पीले रंग का तरल होता है इसमें Hb नहीं पाया जाता है। शरीर में बहुत सारी लासिका ग्रंथि पायी जाती है। जिससे लासिका निकलकर आगे प्रवाहित होता है।लासिका का प्रवाह केवल एक दिशा में होता है अर्थात् यह कोशिकाओं से हृदय की ओर जाती है।
लासिका शरीर को संक्रमण से बचाती है तथा शरीर में अतिरिक्त जल को अवशोषित कर लेता है। लासिका में 0₂ की अपेक्षा CO, अधिक होता है। यह घाव भरने का कार्य करती है। यह रक्त में RBC तथा Plateless के अन्दर नहीं पायी जाती है। पोलियो बीमारी में लासिका तंत्र प्रभावित हो जाता है।
रक्त का थक्का (जमना) बनना (Clotting)
👉 शरीर में किसी कटे स्थान पर रक्त का जम जाना ही रक्त का थक्का या Clotting कहलाता है।
👉 रक्त का थक्का 2 से 5 मिनट रक्त के थक्का बनने की क्रिया को (कैसकेस) Cascale process कहते हैं।
👉रक्त का थक्का निम्नलिखित क्रिया द्वारा बनता है।
👉जब कहीं कट्टा है तो शरीर में रक्त बाहर आता है और रक्त वायु के सम्पर्क में आता है जिस कारण रक्त में उपस्थित थ्रम्बोसाइट (Plalilets) थ्रम्बोप्लास्टिन में बदल जाता है।
👉यह थम्ब्रोप्लास्टिन कैल्शियम से क्रिया करके रक्त में पहले से उपस्थित प्रोथ्रोम्बीन को थ्रोम्बीन में बदल लेता है। यह थ्रोम्बीन रक्त में पहले उपस्थित फाइबिनोजन से क्रिया करके इसे फाइब्रिन में बदल देता है।
👉फाइब्रिन की रचना जाली के समान होती है।
👉 जिसमें रक्त में रूधिराणु (मुख्य रूप से RBC) आकार फँस जाता है जिस कारण रक्त का बहाव रूक जाता है इसे रक्त का स्कंदन या थक्का हते हैं।
1. थ्रम्बोसाइड + वायु → थ्रम्ब्रोप्लास्टिन
2. धम्ब्रोप्लास्टिन + Ca+ प्रोथ्रोम्बीन → थ्रोम्बिन
3.थ्रोम्बिन + फाइब्रिनोजेन → फाइब्रिन
4. फाइब्रिन + रूधिराणु (RBC) → रक्त का थक्का
रक्त के स्कंदन में अनिवार्य पदार्थ
विटामिन → K
रूधिराणु → थ्रम्बोसाइट (Plateles)
धातु या तत्व→ Ca
प्रोटीन → फाब्रिनोजेन तथा प्रोथ्रोम्बिन
Remark:- हेमरेज (नसों का फटना) के करण विटामिन K है। शरीर के अन्दर यदि रक्त जम जाय तो व्यक्ति की मृत्यु हो जायेगी। रक्त के अन्दर हेपरीन नामक प्रोटीन पाया जाता है जो शरीर के अन्दर रक्त को जमने से रोकता है अत: हेपरीन को Anticlotting या Anti coagulant कहते हैं।
हेपरीन वायु के सम्पर्क में आते ही निष्क्रिय हो जाती है ताकि खून का थक्का बन सके। हीमोफीलिया एक अनुवांशिक रोग है। इस रोग में खून का थक्का नहीं बनता है।
👉अत: कटने पर रक्त बहाव नहीं रूकेगा। यह बीमारी इग्लैण्ड की महारानी एलिजाबेथ से प्रारंभ हुआ।
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Biology ( जीवविज्ञान)