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जीवन की मौलिक इकाई कोशिका क्या है (the fundamental unit of life)



जीवन की मौलिक इकाई
(THE FUNDAMENTAL UNIT OF LIFE)


 कोशिका का परिचय:
 
जीव शरीर की रचनात्मक और कार्यात्मक इकाई को कोशिका कहते हैं (The structural and functional unit of living body is called as a cell). यह शरीर की रचनात्मक इकाई है क्योंकि कोशिकाओं के मिलने से शरीर की रचना होती है। यह शरीर की कार्यात्मक इकाई भी है क्योंकि पूरे शरीर के कार्य कोशिकाओं के ही कार्यों के प्रतिफल होते हैं। सभी जीव जन्तुओं की रचनाएँ कोशिकाओं से ही हुई हैं। तथापि, कोशिकीय रचना के आधार पर उन्हें दो बड़े समूहों में बाँटा गया है-

(1) एक कोशिक जीव (Unicellular Organisms)       जैसे—अमीबा (Amoeba), पैरामीशियम (Parameseium), यूग्लीना (Euglena), क्लेमाइडोमोनस (Chlamydomonas), जीवाणु (Bacteria) इत्यादि। इन जीवधारियों को एक कोशिक जीव कहते हैं। इसके शरीर की एकमात्र कोशिका स्वयं से एक सम्पूर्ण जीव होती है तथा सभी जैविक क्रियाएँ जैसे-पोषण, श्वसन, उत्सर्जन, जनन आदि उसी एक कोशिका द्वारा सम्पादित की जाती हैं।

(2) बहु कोशिक जीव (Multicellular Organisms ) जैसे-कवक (Fungi), पादप (Plants) तथा विकसित जन्तु। ये बहु कोशिक जीव एक कोशिक जीवों से ही विकसित हुए हैं। ऐसे जीवों में कोशिकाएँ मिलकर ऊतक बनाती हैं, ऊतक मिलकर अंग बनाते हैं और अंग मिलकर अंगतंत्र ( Organ system) बनाते हैं। ऐसे जीवधारियों में अलग-अलग कार्य, अलग-अलग अंग द्वारा अथवा उनके आपसी समन्वय द्वारा सम्पादित किये जाते हैं। इसे शरीर क्रियात्मक श्रम विभाजन (Physiological Division of Labour) कहते हैं। यही कारण है कि बहु कोशिक जीव एक कोशिक जीवों से अधिक विकसित होते हैं।

 कोशिका की खोज(Discovery of Cell)


सन् 1665 ई० में रॉबर्टहुक (Robert Hooke) नामक अंग्रेज वैज्ञानिक ने स्वनिर्मित साधारण सूक्ष्मदर्शी से कार्क की रचना का अध्ययन करते समय मधुमक्खी के छत्ते के समान निर्जीव रचनाओं को देखा। उन्होंने इस छत्ते के समान रचना के अन्दर पायी जानेवाली छोटी पट्कोणीय रचनाओं को कोशिका (cell) कहा। तत्पश्चात् सन् 1833 ई० में रॉबर्ट ब्राउन (Robert Brown) ने कोशिकाओं के भीतर गोलाकार रचनाओं को देखा जिन्हें बाद में केन्द्रक (Nucleus) कहा गया। इसके बाद दुजार्दिन ने कोशिका के भीतर जीवित पदार्थ के होने का पता लगाया। पुरकिंजे (Purkinje) ने सन् 1839 ई० में उसका नाम जीवद्रव्य (Protoplasm) रखा। कोशिका के सम्बन्ध में पूरी जानकारी इलेक्ट्रॉन सूक्ष्मदर्शी के आविष्कार के बाद।

मानव शरीर की विभिन्न कोशिका है
   

कोशिका सिद्धान्त(Cell Theory)


सन् 1838 ई० में जर्मन वैज्ञानिक एम० जे० श्लाइडेन (M. J. Schleiden) एवं 1839 ई० में टी० श्वान (T. Schwan) ने कोशिका सिद्धान्त (Cell Theory) का प्रतिपादन किया। इस सिद्धान्त के अनुसार

(I) सभी जीवों की कोशिकाओं से हुई है और
 (2) उपापचय सम्बन्धी क्रियाएँ कोशिकाओं में होती हैं।

सन् 1855 ई० में आर० वरचाऊ ( R. Virchow) सिद्धान्त में संशोधन करते हुए यह जोड़ा कि पहले से मौजूद कोशिकाएँ नई इस कोशिका कोशिकाओं की उत्पत्ति करती हैं। प्रसिद्ध जीव वैज्ञानिक डी० बैरी एवं शुल्ज के अध्ययन से साबित हुआ कि कोशिकाएँ जीवद्रव्य से बनी छोटी-छोटी रचनाएँ हैं जिनमें केन्द्रक पाये जाते हैं। सन् 1884 ई० में स्ट्रासबर्गर ने बताया कि केन्द्रक पैत्रिक लक्षणों के पीढ़ी-दर-पीढ़ी स्थानान्तरण के लिए उत्तरदायी है।

कोशिकाओं के प्रकार (Types of Cells)

जीव-वैज्ञानिक अनुसंधानों से यह प्रमाणित है कि कोशिकाएँ मुख्यतः दो प्रकार की होती हैं-(1) प्रोकैरियोटी (Prokaryotic) और (2) यूकैरियोटी (Eukaryotic)

1. प्रोकैरियोटी कोशिकाएँ: वे अविकसित कोशिकाएँ जिनमें पूर्णतः संगठित और व्यवस्थित केन्द्र नहीं पाये जाते; जैसे जीवाणुओं और नीलहरित शैवालों की कोशिकाएँ। ऐसी कोशिकाओं को पुरातन या अविकसित अथवा प्रोकैरियोटी (Prokaryotic) कोशिकाएँ कहते हैं।
प्रोकैरियोटिक (जीवाणु) कोशिका की आंतरिक रचना

2. ससीम केन्द्रकी या यूकेरियोटिक कोशिकाएँ: वे कोशिकाएँ जिनमें पूर्ण विकसित केन्द्रक एवं सभी कोशिकांग पाये जाते हैं, जो कोशिकाएँ सभी विकसित और जटिल रचनावाले जीवों के शरीरों में पायी जाती हैं, ऐसी कोशिकाओं को विकसित कोशिकाएँ या यूकैरियोटिक (Eukaryotic) कोशिकाएँ कहते हैं।

प्रोकैरियोटिक एवं यूकैरियोटिक कोशिका में अंतर (difference between prokaryotic and eukaryotic cells)
 

प्रोकैरियोटी कोशिका(Prokaryotic)
1. इन कोशिकाओं का आकार प्रायः छोटा होता है (1 माइक्रॉन और 10 माइक्रॉन के बीच में) । 1 um
10-6 m
2. केन्द्रक-क्षेत्र या न्यूक्लिआइड किसी झिल्ली से घिरा हुआ नहीं होता है ।
3. इनमें केवल एक गुणसूत्र पाया जाता है।
4. इनमें केन्द्रिका या न्यूक्लिओलस नहीं पायी जाती है ।
5. इनमें कोशिकांग नहीं पाये जाते हैं।
6. इनमें कोशिका विभाजन मुकुलन द्वारा होता है। सूत्री विभाजन नहीं होता है ।

यूकैरियोटी (Eukaryotic)

1. इनका आकार प्रायः बड़ा होता है (5 माइक्रॉन से 100 माइक्रॉन के बीच में ) ।
2. केन्द्रक क्षेत्र एक झिल्ली द्वारा घिरा हुआ होता है।
3. इनमें एक से अधिक गुणसूत्र पाये जाते हैं ।
4. इनमें केन्द्रिका पायी जाती है।
5. इनमें कोशिकांग पाये जाते हैं ।
6. इनमें समसूत्रण या अर्धसूत्रण द्वारा कोशिका विभाजन होता है।

कोशिका की बनावट एवं आकार (Shapes and Sizes of Cells)


कोशिकाएँ बनावट और आकार के आधार पर विभिन्न प्रकार की होती हैं, जैसे—गोलाकार, चौकोर, तर्कुरूपी (spindle shaped), बहुभुजाकार, अंडाकार एवं अनियमित (irregular)। अमीबा की कोशिका एवं श्वेत रक्त कोशिकाओं के आकार बदलते रहते हैं। कोशिकाओं के आकार एक सीमा तक उनके कार्यों पर निर्भर करते हैं। अलग-अलग जीवों में इनकी संख्या भी अलग-अलग होती है। कुछ कोशिकाएँ इतनी सूक्ष्म होती हैं कि उन्हें केवल सूक्ष्मदर्शी से देखा जा सकता है। उनका आकार लगभग 0.1 से 5 माइक्रो मीटर (1 माइक्रोमीटर = 1/100 मिमी०) के बीच होता है। वहीं दूसरी ओर ऐसी कोशिकाएँ हैं, जैसे शुतुर्मुर्ग का अंडा, जिसका व्यास 18 सेमी० तक होता है। कुछ तन्त्रिका कोशिकाएँ लगभग 1 मी० तक लम्बी होती हैं।

कोशिका की सूक्ष्म रचना (Ultra Structure of a Cell)


कोशिका की आन्तरिक रचना का विस्तृत अध्ययन तभी सम्भव हो पाया जब सन् 1932 ई० में जर्मनी के एम० नॉल और रस्का (M. Knoll and E. Ruska) नामक वैज्ञानिकों ने इलेक्ट्रॉन सूक्ष्मदर्शी की रचना की। इलेक्ट्रॉन से लगभग एक लाख गुना आवर्धित प्रतिबिम्ब देखे जा सकते हैं। 

 विभिन्न कोशिकांग रचनाएँ और कार्य (Various cell organelles: Structure & Functions)

एक प्रारूपी कोशिका को इलेक्ट्रॉन सूक्ष्मदर्शी की सहायता से देखने पर उनमें बहुत से अंगक् (organelles) दिखायी देते हैं। अत्यन्त छोटे-छोटे अंगों को अंगक कहते हैं। उन अंगकों को उनकी विशेष बनावट और रासायनिक रचना के आधार पर पहचाना जाता है। एक अच्छी तरह रंजित (stained) कोशिका में वे सभी अंगक अलग-अलग और साफ-साफ दिखायी देते है। सभी कोशिकाओं में 3 मुख्य कार्य क्षेत्र होते हैं। वे कार्य क्षेत्र हैं- प्लाज्मा झिल्ली, केन्द्रक और कोशिका द्रव्य कोशिका के अंगों के नाम और उनके विवरण निम्नवत् हैं।

(1) प्लाज्मा झिल्ली अथवा कोशिका झिल्ली (Plasma Membrane) प्रत्येक कोशिका की सम्पूर्ण आन्तरिक रचनाएँ लिपिड एवं प्रोटीन के अणुओं से बनी एक जीवित झिल्ली से घिरी होती हैं, इसे प्लाज्मा झिल्ली कहते हैं। यह झिल्ली अर्धपारगम्य (Semipermeable) होती है अर्थात् कुछ विशेष पदार्थ इससे होकर अन्दर-बाहर आना-जाना कर सकते हैं। अपनी इसी विशेषता के कारण यह झिल्ली कोशिका के रासायनिक संघटन को संतुलित रखती है, कोशिका को निश्चित आकार प्रदान करती है और कोशिकांगों की सुरक्षा करती है।

कोशिका में पदार्थों की गति - कोशिकाओं के भीतर विभिन्न प्रकार के. पदार्थों की गति होती है। परन्तु कोशिका झिल्ली या प्लाज्मा झिल्ली केवल कुछ विशेष पदार्थों को ही अपने से होकर गुजरने देती है, सभी पदार्थों को नहीं। इसीलिए प्लेज्मा झिल्ली को वर्णात्मक पारगम्य झिल्ली कहा जाता है।

कोशिकाओं से होकर पदार्थों का आवागमन विसरण (diffusion) की प्रक्रिया द्वारा सम्पादित होता है। जब कोई पदार्थ (जैसे- CO2या O2) उच्च सान्द्रता से निम्न सान्द्रता की और गमन करता है तब उस प्रक्रम को विसरण कहते है।
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