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Mi-17V-5 हेलीकॉप्टर की खासियत / (Mi-17V-5 helicopter crash)


 जिस MI-17 आधुनिक हेलिकॉप्‍टर में जनरल बिपिन रावत समेत 14 लोग सवार थे। उस हेलीकॉप्टर की क्‍या खासियत है, इसकी क्षमता कितनी है , इसका यूज कब और किस किस परिस्थिति में करते हैं और इसे सबसे आधुनिक हेलिकॉप्‍टर क्‍यों कहते हैं, चलिए जानते हैं इन सभी सवालों के जवाब......



MI-17 को क्‍यों कहते हैं दुन‍िया का सबसे एडवांस हेलिकॉप्‍टर, जिसमें पीएम मोदी समेत कई वीवीआईपी करते हैं सवारी  

    Mi-17V-5 हेलिकॉप्‍टर दुनिया के करीब 60 देश के सैनिक और वहा के शासक प्रसाशक यूज करते है।

Mi-17V-5 हेलिकॉप्‍टर 36 हजार किलो तक का वजन उठा सकता है.

तमिलनाडु के कन्नूर में ( नीलगिरी पर्वत) बुधवार 8/12/2021 को सेना का MI-17 हेलिकॉप्टर क्रैश हो गया। इसमें चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ (CDS) जनरल बिपिन रावत और उनकी पत्‍नी समेत सेना के कई प्रमुख अधिकारी सहित 14 लोग सवार थे. इनमें से 11 के शव बरामद किए जा चुके हैं। मिली सूचना के मुताबिक, हेलिकॉप्टर सुलूर एयरबेस से वेलिंगटन जा रहा था, लेकिन यह नीलगिरी पहाड़ी में क्रैश हो गया।

 खिर क्‍यों खास है MI-17 हेलिकॉप्टर?


Mi-17 V5 को रूस की कंपनी कजान हेलिकॉप्‍टर बनाती है. यह एक डबल इंजन मल्‍टीपर्पज हेलिकॉप्‍टर है और MI-8 का अपग्रेडेड वर्जन है। यह एक मीडियम लिफ्ट हेलिकॉप्‍टर है. 

यह क्रू मेंबर के 3 लोगों के साथ 36 सैनिकों को ले सकता है. दुनिया के करीब 60 देशों में 12 हजार से ज्‍यादा MI-17 हेलिकॉप्टर मौजूद हैं. इसे अध‍िक ऊंचाई और तेज गर्म मौसम में काम करने के लिहाज से तैयार किया गया है. 

Mi-17V-5 की गिनती दुनिया के सबसे एडवांस ट्रांसपोर्ट हेलिकाप्टरों में की जाती है. इसलिए इसका इस्‍तेमाल रेस्‍क्‍यू मिशन, ट्रांसपोर्टेशन, हैवीलिफ्ट और बड़े - बड़े वीवीआईपी लोगो के मूवमेंट में होता है. 

यह 36 हजार v किलो तक का वजन उठा सकता है. जिन Mi-17V-5 को वीवीआई के लिए डिजाइन किया जाता है उसमें 20 लोग बैठ सकते हैं और इसमें खासतौर पर टॉयलेट भी होता है. 

Mi-17V-5 हेलीकॉप्टर भारत में कब आया था ?

डिफेंस मंत्रालय ने 80 Mi-17V-5 के ऑर्डर के लिए रूस के साथ 1.3 बिलियन डॉलर की की डील की थी. 2011 से इनकी डिलीवरी शुरू हुई थी. 2013 तक 36 Mi सीरीज हेलिकॉप्टर्स मिल चुके थे. भारत को Mi-17V-5 की आखिरी खेप जुलाई 2018 में मिली थी. 

बुधवार को क्रैश हुए विमान में लगे ब्‍लैक बॉक्‍स के बारे में अब तक कोई जानकारी नहीं मिल पाई है. इस बॉक्‍स से घटना से जुड़ी कई जरूरी बातें इस बॉक्स से  सामने आ सकती हैं.

ब्लैक बॉक्स क्या होता है।

यह बॉक्‍स प्‍लेन का एक जरूरी भाग होता है. इसका काम विमान की गतिविधियों के डाटा को रिकॉर्ड करने के लिए होता है. इसलिए इसे flight data recorder भी कहते हैं. यह विमान के पिछले भाग में होता है. यह इंजन की आवाज, इमरजेंसी अलार्म की आवाज , केबिन और कॉकपिट की आवाज को रिकॉर्ड करता है, ताकि यह पता चल सके कि हादसे के पहले विमान किस परिस्थिति में था।

टाइटेनियम धातु के बने होने के कारण ब्‍लैक बॉक्‍स को काफी मजबूत माना जाता है. इसे इसलिए मजबूत बनाया जाता ताकि ऊंचाई से जमीन पर गिरने या समुद्री पानी में गिरने की स्थिति में भी इसको कम से कम नुकसान हो। और हेलीकॉप्टर में हुई सभी दरबारियों का डाटा सुरक्षित रहे।


ब्लैक बॉक्स क्या काम करता है

                   ब्लैक बॉक्स (फ्लाइट डाटा रिकॉडर)

इसका काम विमान की दिशा, ऊंचाई, ईधन का लेबल , गति और हेलीकॉप्टर का अंदर का तापमान आदि को रिकॉर्ड करने का काम करता है. खास बात है कि ब्‍लैक बॉक्‍स 11000°C के तापमान को एक घंटे तक सहन कर सकता है. यह बिना बिजली के 30 दिन तक काम करता है. हादसे के बाद यह जहां भी गिरता है वहां से लगातार 30 दिन तक साउंड और तरंगे निकालता रहता है. इसकी मदद से क्रैश हुए हेलीकॉप्टर की जगह का पता खोज लिया जाता है।

 

Mi-17V-5 हेलीकॉप्टर वीडियो 

 


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