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चालुक्य वंश chaluky vansh) (550 ई.-757 ई.)

चालुक्य वंश (550 ई.-757 ई.)

सतपुड़ा पर्वत के दक्षिण में चालुक्य वंश का उदय हुआ। इनकी 3 शाखाएँ थी।

(i) वातापी

(ii) कल्याणी

(iii) बेंगी

'वातापी का चालुक्य"
वातापी का वर्तमान नाम बादामी है।

यह तीनों चालुक्य में सबसे पश्चिम में स्थित था।

* इसी ने चालुक्य की नींव रखी थी।

* इस वंश के संस्थापक जयसिंह थे।

* इस वंश का अगला शासक कीर्तिवर्मन-I था। इसे चालुक्य का निर्माता कहा जाता है।

* पुलकेशिन-II इस वंश का सबसे प्रतापी शासक था। * इसने नर्मदा नदी को पार करके कन्नौज के शासक हर्षवर्धन
को पराजित कर दिया। 
* इसने दक्षिण भारत में पल्लव शासक महेन्द्र वर्मन को पराजित कर दिया तथा उसकी राजधानी कांची को जीतकर काँचीकोंड की उपाधि धारण कर लीया ।

* पुलकेशिन-II ने दुबारा पल्लव पर आक्रमण किया। किन्तु पल्लव शासक नरसिंह वर्मन ने इसे पराजित कर दिया और उसका पीछा करते हुए उसकी राजधानी वातापी तक पहुँच गया एवं वातापी जीत कर वातापीकोंड की उपाधि धारण कर ली और पुलकेशियन-II की हत्या कर दी। 

* पुलकेशिन-II के राजकीय कवि रविकिर्ती था।

* इस वंश का अंतिम शासक किर्तीवर्मन-II

* कीर्तिवर्मन-II की हत्या दन्तिदुर्ग ने कर दी और इसके स्थान पर राष्ट्रकूट वंश की स्थापना कर दी तथा चालुक्यों को अपना सामंत बना लिया।

* किन्तु चालुक्य के अंदर बदले की भावना थी। ये राष्ट्रकूट की कमजोर स्थिति का इंतजार कर रहे थे। ताकि राष्ट्रकूट का अंत किया जा सके। 

"कल्याणी का चालुक्य"
* चालुक्य जो सामंत का जीवन जी रहे थे, राष्ट्रकूट की कमजोर स्थिति का फायदा उठा लिया और राष्ट्रकूट के अंतिम शासक कर्क-II की हत्या तैलप - II नामक चालुक्य ने कर दी।

* यहीं कल्याणी के चालुक्य का संस्थापक था ।

* इस वंश का अगला शासक सोमेश्वर था। जिसने राजधानी मान्नखेट से कल्याणी स्थानान्तरित किया, जिस कारण इस वंश का नाम कल्याणी का चालुक्य हो गया।

* सोमेश्वर को चोल शासक राजराम ने कई बार पराजित कर दिया जिससे अपमानित होकर सोमेश्वर ने तुंगभद्रा नदी में आत्महत्या कर ली।

इस वंश का अगला शासक विक्रमादित्य - VI बना। यह एक कुशल योद्धा था ।
 * विक्रमादित्य-VI ने चोल के प्रभाव को रोक दिया। यह
    साहित्य प्रेमी था ।

* इसके राजकीय कवि विल्हन थे।

* इन्होंने विक्रमांकदेव चरित्र नामक पुस्तक लिखी।
 * इसके दरबार में मित्राक्षर विज्ञानेश्वर रहते थे। जिन्होंने मित्राक्षरा नामक पुस्तक लिखी।

* इस वंश के अंतिम शासक सोमेश्वर - IV थे ।

"बेंगी का चालुक्य " ( पूर्वी चालुक्य)


* पुलाकेशिन २के भाई विष्णुवर्धन ने इस वंश की नींव रखी थी।
* इसने अपनी राजधानी वैगी
 को बनाया । इसीलिए ये वेंगी के चालुक्य कहलाए।
* इसी विष्णुवर्धन की पत्नी आयना महादेवी ने विजयवाड़ा में जैन मंदिर का निर्माण करवाया था।
* यह चालुक्य की सबसे कमजोर शाखा थी, जो आंध्रप्रदेश के बेंगी में थी।

* इस वंश के संस्थापक विष्णुवर्धन थे।

* इस वंश में कोई भी प्रतापी शासक नहीं हुआ। * इस वंश का सबसे योग्य शासक विजयादित्य - III था |


प्रमुख शासक
 जयसिंह
  ⬇️
इंद्र वर्धन
  ⬇️
विष्णुवर्धन २
  ⬇️
जय सिंह २
  ⬇️
विष्णुवर्धन २
   ⬇️
  विजयादित्य १
    ⬇️
विष्णुवर्धन ४
    ⬇️ 
विजयादित्या ३



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