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अकबर (akabar) 1556ई०- 1605ई०

अकबर


🔹अकबर का जन्म 15 अक्टूबर, 1542 को अमरकोट के राजा वीरसाल के महल में हुआ थ। अकबर की मा हमिदा बानो बेगम थी। (धाय माँ = माहम अनगा थी)

🔹बचन में अस्करी ने पाला और फिर काबुल में कामरान के पास भेज दिया (1547 से अकबर हुमायूं के साथ रहने लगा), अकबर की प्रथम पत्नी हिंदाल की पुत्री रूकैया थी।

🔹 1556 ई. में हुमायुं जब भारत पर पुनः आक्रमण किया और मच्हीवाड़ा का युद्ध लड़ा। इस युद्ध में हुमायुं के साथ अकबर भी भाग लिया। यह युद्ध अकबर के जीवन का पहला युद्ध था।

🔹1555 में हुमायूँ ने अकबर को अपना उत्तराधिकारी बनाकर लाहौर का सूबेदार बनाया। 
🔹1556 में जब हुमायूँ की मृत्यु हुई तब अकबर पंजाब का सुवेदार था (17 दिन तक हुमायूँ की मृत्यु को गुप्त रखा गया।) 14 फरवरी, 1556 को पंजाब से कालानौर (गुरुदासपुर विला) में मिर्जा अब्बुल कासिम ने अकबर का राज्याभिषेक कराया।

🔹राज्याभिषेक के समय अकबर अल्पायु था अतः वैरम खान को अकबर का संरक्षक नियुक्त कर दिया गया।
🔹 बैरन खान अकबर को लेकर आगरा की ओर बढ़ा किन्तु इससे पहले ही आदिल शाह सूरी का सेनापति हेमू आगरा पर अधिकार कर लिया। साथ ही साथ हेमू ने दिल्ली पर अधिकार कर लिया। हेमू दिल्ली का एक बनिया था जिसने विक्रमादित्य का उपाधि धारण किया था।

🔹दिल्ली में मुगल सेनापति तरवीवेग ने वैरम खां को भारत छोड़ने की सलाह दिया जिस कारण वैरम खान ने उसकी हत्या कर दी।

🔹1556 के पानीपत के द्वितीय युद्ध में अकबर के सेना का नेतृत्व वैरम खान ने किया और इस युद्ध में वैरम खान ने हेमू को पराजित कर दिया। यह युद्ध अकबर का शासक बनने के बाद पहला युद्ध था।

🔹अकबर ने वैरम खान के संरक्षण में शासन आरम्भ किया जिस कारण वैरम खां अत्यधिक प्रसिद्ध हो गया।

 🔹वैरम खान शिया था। जबकि दिल्ली की अधिकांश जनता सुन्नि था। यही विवाद आगे चलकर युद्ध का रूप लिया और तिलवाड़ा का युद्ध (1560) में अकबर ने वैरम खान को हरा दिया और वैरम खां के आगे दो प्रस्ताव रखा --  
    1. वैरम खा या तो दूर के किसी सूवा (राज्य) के सुवेदार           बन जाए। वैरम खां या तो हज यात्रा पर चले जाएं।

     2. वैरम खान ने हज यात्रा को चुना। हज पर जाते                 समय गुजरात के मुबारक खां नामक व्यक्ति ने वैरम            खां की हत्या कर दी।

🔹वैरम खां का बेटा अब्दुल रहीम था तथा उसकी पन्ती सलीमा बेगम थी। अकबर ने सलीमा बेगम से शादी कर ली। 
🔹1560 में अकबर जैसे ही वैरम खां के संरक्षक से मुक्त हुआ तो अपनी धाय माँ माहम अनगा के प्रभाव में आ गया और दो वर्षों तक उसके प्रभाव में रहा। इस दो वर्ष के शासन को पेटीकोट शासन, पर्दा प्रथा का शासन हरम दल का शासन या अतका खेल का शासन कहा गया।

🔹1562 में अकबर हरम दल के प्रभाव से मुक्त हो गया।

🔹अकबर ने 1562 में दास प्रथा का अन्त 1563 में तीर्थ यात्रा कर का अन्त तथा 1564 में जजिया कर का अन्त कर दिया गया।
🔹1571 ई. में अकबर ने फतेहपुर सिकरी शहर को स्थापना किया। 1575 ई. में अकबर ने इबादत खाना की स्थापना फतेहपुर सिकरी में किया। इस इबादतखाना में सभी धर्मों के लोग बृहस्पतिवार के दिन इकट्ठा होते थे और अपने अपने धर्म को विशेषता का उल्लेख करते थे। किन्तु बहुत ही जल्द वह इबादतखाना को बन्द करना पड़ा क्योंकि यहां मारपीट: शुरु हो जाती थी अकबर के इस निति को सुलह-ए-कुल को निति कहा गया।

🔹1578 में सभी धर्मों के लोगों के इबादत खाना में प्रवेश, अकबर ने अमीर-उल-मोमिनी की उपाधि धारण किया जो केवल खलीफा धारण करते थे।

🔹1579 ई. में अकबर ने मजहर की घोषणा की। इसके तहत धार्मिक मामले में अकबर सर्वोपरि हो गया। मजहर के तहत अकबर ने धार्मिक एकाधिकार प्राप्त कर लिया। धार्मिक विवादों को राजा हल करेगा किन्तु कुरान पर राजा का कोई अधिकार नहीं होगा।

🔹1582 ई. में अकबर ने दिन-ए-इलाही नामक एक नया धर्म चलाया। यह धर्म मानने के लिए कोई बाध्य नहीं था। यह लोगों को इच्छा पर था। 

🔹दिन-ए-इलाही धर्म को मानने वाला एक मात्र हिन्दू महेशदास (बिरबल) था।

🔹 दिन-ए-इलाही धर्म का प्रधान पुरोहित (पॉडत) अबूल फजल थे।

🔹1583 ई० में अकबर ने एक नया Calender इलाही संवत जारी किया।

🔹अकबर के दरबार में हिन्दू धर्म के विद्वान पुरुषोत्तम तथा कुम्भनदास रहते

🔹पारसी धर्म के विद्वान दस्तूर मेहर जो राणा रहते थे।
🔹इसाई धर्म के एकाबीबी रहते थे।

🔹अकबर के दरबार में जैन विद्वान हरिविजय सूरो थे। अकबर ने इन्हें गुरु की उपाधि दिया था।

🔹अकबर ने चौथे सिख गुरु राम दास को अमृतशह की स्थापना के लिए 500 बिघा जमीन दान दिया।

🔹अकबर के समकालिन सूफि सन्त शीख सलीम चिश्ती थे। अकबर इनसे सर्वाधिक प्रभावित था इसी कारण अकबर ने अपने बेटे का नाम सलिम रखा। जो आगे जाकर जहांगिर के नाम से जाना गया। 
🔹शेखा सलिम चिश्ती का मकबरा फतेहपुर सिकरी में है। फतेहपुर सिकरी शहर का वास्तुकार (desinor) वहाउद्दीन थे।

💠 मुद्रा प्रणाली :-
🔹अकबर ने राम-सीता प्रकार के सिक्के चलाए। अकबर ने रुपया तथा दाम सिक्कों को भी निरन्तर जारी रखा।

   1 रुपया (अकबर) = 40 दाम

   1 रुपया (शेरशाह) = 64 दाम

🔹अकबर के समय वृत्ताकार सिक्का "इलाही" तथा आयताकार सिक्का "जलाली" कहलाता था।

   1 इलाही = 10 रुपया

💠 अकबर के समय भू-राजस्व व्यवस्था :-

जाब्ती प्रणाली : - भूमि के माप (आकार) के आधार पर लगान (Tax) निर्धारण व्यवस्था को जाब्ती प्रणाली कहते हैं।

कनकूट प्रणाली :- ऊपज के ध्यान में रखकर लगान (Tax) निर्धारण व्यवस्था को कनकूट व्यवस्था कहते हैं।

🔹आईन-ए-दहसाला : - दस वर्षों के औसत ऊपज को आधार मानकर लगान (Tax) का निर्धारण आइन-ए-दहसाला कहलाता है। यह लगान निर्धारण की एक औसत प्रणाली है। इसका श्रेय टोडरमल को जाता है।
 Note: भू-राजस्व को खराज भी कहते थे यह ऊपज का 1/2 भाग (50%) से 1/3 ( 33%) तक रहता था।

💠अकबर ने भूमि को ऊपज के आधार पर चार श्रेणी में बाँटा था : 
1. पोजल भूमि             -       प्रतिवर्ष खेती

2. परती भूमि.             -.       एक वर्ष अंतराल पर खेती

3. चाचर भूमि.            -.       चार वर्ष अंतराल पर खेती

4. बंजर भूमि.           -.        यहाँ खेती नहीं होती थी

💠अकबर ने लगान वसूली के आधार पर भूमि को चार श्रेणी में बाँटा :
1. खालस भूमि :- यह सरकारी भूमि होती थी।

2. जागी भूमि :- यह मनसबदार को दी गई भूमि थी।

3. पैबाकी भूमि:- यह सरकार के अधीन रहती थी इसके द्वारा जागीदारों के घाटे की पूर्ति की जाती थी।

4. मददमाश भूमि:- यह दान में दी जाती थी।

💠अकबर के नवरत्न

🔹अकबर के दरबार में विभिन्न क्षेत्र के 9 विद्वान रहते थे जिन्हें नवरत्न कहा जाता है।⤵️

 1. बीरबल - इसका असली नाम महेश दास था। यह दिन-ए-इलाही को मानने वाले एक मात्र हिन्दू (राजपूत) थे। यह अकबर के प्रधान सलाहकार थे। इनकी मृत्यु 1586 ई. में युसुफ जाही के विद्रोह को दबाते समय हो गयी। (उपाधि = कविप्रिय, राजा)

2. तानसेन :- यह अकबर के दरबार में सबसे प्रसिद्ध संगितकार थे। इनका जन्म ग्वालियर में हुआ। इनका मूल नाम (असलनाम) राम तनु पाण्डेय था। इनकी प्रमुख रचना मिया का टोपी, मिया का मल्हार ।

3. मानसिंह :- यह राजा भारमल का पोता, भगवानदास का बेटा था। अकबर ने सर्वाधिक युद्ध इसी के नेतृत्व में जीता।

4. टोडरमल :- यह अकबर के दरबार में भूमि तथा राजस्व सुधारक थे। इन्होंने राजस्व के क्षेत्र में एक नई व्यवस्था आईने दहशाला लेकर आये। टोडरमल अकबर से पहले शेरशाह के दरबार में कार्यरत थे।

5. अबुल फजल:-  यह दिन-ए-इलाही धर्म का मुख्य पुरोहित था। इसने अकबरनामा पुस्तक लिखली जिसमें अकबर की चर्चा है। यह पुस्तक सात साल में लिखी गयी। इस पुस्तक के 3 भाग है तीसरा भाग आइने अकबरी कहलाता है। जो खुद अबूल फजल की आत्मकथा है। 1602 ई. में वीर सिंह बुन्देलाने इनकी हत्या कर दी।

6. फैजी :- अबूल फजल के बड़े भाई थे जो कवि के पद पर थे। इन्होंने गीता तथा लीलावती पुस्तक का फारसी अनुवाद किया।

7. अब्दुल रहीम खाने खाना:- यह वैरम खान का पुत्र था। अकबर ने इसे अनुवाद विभाग का प्रधान बनाया। इसने बाबर की आत्मकथा तुजुक-ए-बावरी का फारसी में अनुवाद किया और इस अनुवादित पुस्तक का नाम बाबरनामा है। 
8. मुल्ला दो प्याजा :-यह अरब का रहने वाला था जो प्रमुख व्यंगकार (मजाकिया) था। इसे भोजन के साथ दो प्याज खाने की आदत थी।

9. हकीम हुकाम :- यह अकबर के दरबार में बावर्ची के पद पर थे।
Remark:- 
      तुलसीदास अकबर के समकालिन थे। अकबार के कहने को बाद भी वे नवरत्न में शामिल नहीं हुए।

 💠मनसबदारी व्यवस्था :
🔹यह अकबर की सैन्य तथा प्रशासनिक व्यवस्था थी।

🔹मनसबदार को पैदल सैनिक (जाट) तथा घुड़सवार (सवार) रखने होते थे। जिसके बदले में अकबर मनसबदारों को वेतन देता था।

🔹पैदल सैनिक (जाट) का वेतन प्रतिमाह = 3 रु

🔹घुड़सवार सैनिक (सवार) का वेतन प्रतिमाह 20 रु

🔹मनसदार 3 श्रीणी के होते थे।

     A. प्रथम श्रेणी – 1200 सैनिक

     B. द्वितीय श्रेणी 7000 सैनिक

     C. तृतीय श्रेणी - 10-20 सैनिक

🔹युद्ध के समय सभी मनसबदार अपनी सेना लेकर आते थे। सर्वाधिक हिन्दु मनसबदार औरंगजेब के पास थे।

 अकबर की राजपूत नीति :- 
🔹अकबर की राजपूत नीति "दमन और समझौते" की नीति थी।
🔹राजपूत नीति के तहत अकबर राजपूत राजाओं की सहानभूति प्राप्त करना चाहता था।
🔹अकबर ने राजपूत राजाओं को जागीरदार तथा पैतृक जागीर पर शासन का अधिकार दिया उनके राजा का पद भी बना रहा। किन्तु उन्हें स्वयं के सिक्के चलाने का अधिकार छीन लिया और उनके क्षेत्र में मुगलशाही सिक्का प्रचलन करवाया।

💠 अकबर का सैन्य अभियान

🔹अकबर ने सर्वप्रथम 1559 में ग्वालियर अभियान किया।

🔹1560 में अकबर ने जौनपुर अभियान किया।

🔹1561 में चुनार तथा मालवा अभियान किया।

🔹1562 में आमेर पर आक्रमण किया। आमेर की राजधानी जयपुर थी और आमेर के राजा भारमल (कछवाहा राजपूत) थे।

🔹राजा भारमल एक मात्र राजपुत राजा थे जिन्होंने अकबर की अधिनता स्वेच्छा से स्वीकार किया और अपनी बेटी जोधा बाई (हरखा बाई) का विवाह अकबर से कर दिया और अपने बेटे भगवान दास तथा पोता मान सिंह को अकबर की सेवा में भेजा (अकबर ने जोधाबाई को मरीयम उज- जमानि की उपाधि दिया)

🔹गोड़वाना (MP) की रानी दुर्गावति (संग्राम सिंह की विधवा) ने कभी भी अकबर की अधिनता स्वीकार नहीं किया। यह एक मात्र महिला थी जिसने अकबर का सर्वाधिक विरोध किया। अंतत: गोण्डवाना (MP) पर अकबर का अधिक हो गया।

🔹1567 में अकबर ने मेवाड अभियान किया। इस समय मेवाड की राजधानी वित्तड़ थी और वहां के राजा उदय सिंह थे (मेवाड) चितेड़ अभियान पूरा होने से पहले ही अकबर लौट गया। पुन: अकबर ने 1576 ई. में मेवाड अभियान किया और हल्दिबाटी के युद्ध में उदय सिंह के पुत्र महाराणा प्रताप को पराजित कर दिया। अकबर की सेनापति मानसिंह थे जबकि महाराणा प्रताम का सेनापति हकीम खान शुर था। प्रारम्भ में युद्ध राणा प्रताप सिंह जीत रहे थे किन्तु यह अपवाह फैलाया गया कि अकबर भी युद्ध में शामिल हो गया जिससे मुगल सेना का मनोबल बढ़ गया। किन्तु महाराणा प्रताप जंगल में भाग गए इस प्रकार मेवाड अभियान अधुरा रह गया। धीरे-धीरे राणा प्रताप ने पुनः अपने अधिकांश क्षेत्र पर अधिकार कर लिया।

🔹1572 में अकबर ने गुजरात अभियान किया इसी समय अकबर ने पहली बार समुन्द्र को देखा था। (खम्भात की खाड़ी यहीं पर अकबर पुर्तगालियों से भी मिला था।

🔹अकबर ने जब गुजरात को हराकर वापस लौटा तो गुजरात के शासकों ने अकबर की अधिनता मानने से अस्वीकार कर दिया। इसी कारण अकबर ने पुनः 1573 ई. में गुजरात अभियान किया। यह अकबर का सबसे द्रुतगामी अभियान था। (9 दिन) इसी गुजरात विजय के उपलक्ष्य में अकबर ने फतेहपुर सिकरी में बुलन्द दरवाजा का निर्माण कराया।

🔹अकबर ने बंगाल तथा बिहार को मुगल साम्राज्य में 1576 में मिला लिया।

🔹अकबर ने 1581 में कबूल अभियान। 1586 में कश्मीर अभियान किया और इसे जीत लिया। कश्मीर के यूसूफजाई कबीले के विद्रोह में ही बीरबल की मृत्यु हो गयी। 1595 में कंधार, बलुचिस्तान भी जीत लिया।

💠 दक्षिण भारत अभियान :- 

🔹अकबर ने दक्षिण भारत विजय के लिए अब्दुल रहीम और उसके पुत्र मुराद के नेतृत्व में सेना भेजा।

🔹अकबर दक्षिण भारत अभियान करने वाला पहला मुगल शासक था।

🔹 दक्षिण भारत 4 प्रमुख राज्य थे। 
1. खानदेश 2. अहमदनगर 3. बीजापुर 4. गोलकुण्डा

🔹खान देश के दक्षिण भारत का प्रवेश द्वार कहते हैं। खानदेश ने स्वतः अकबर की अधिनता स्वीकार कर लिया।

🔹अकबर ने अहमदनगर की शासिका चांदीबीबी से युद्ध करके उससे बरार तथा अमदनगर का क्षेत्र जीत लिया।

🔹बीजापुर के शासक ने भी अकबर की अधीनता स्वीकार कर लिया।

🔹1601 में खान देश ने विद्रोह कर दिया जिसे असीरगढ़ के युद्ध में अकबर ने विद्रोह समाप्त कर दिया। यह युद्ध अकबर ने रिश्वत देकर जीता था। असीरगढ़ का युद्ध अकबर के जीवन का अंतिम युद्ध था।

🔹इस प्रकार असीरगढ़, बीजापुर, अहमदनगर, खानदेश तथा बरार पर मुगलो का अधिकार हो गया।

🔹1602 ई. में जहांगीर ने अपने पिता के विरुद्ध इलाहाबाद में विद्रोह कर दिया। इस विद्रोह को दबाने के लिए अकबर ने अबूल फजल को भेजा। किन्तु जहांगिर के कहने पर वीर सिंह बुन्देला ने इनकी हत्या कर दी।

🔹1605 ई. में डायरिया के कारण अकबर की मृत्यु हो गयी।

Remark - अकबर के गुरु अब्दुल लतीफ थे जो एक योग्य व्यक्ति थे किन्तु अकबर ने निरक्षर ही रह गया। फिरोज शाह तुगलक (F.S.T.) को सल्तनत काल का अकबर कहा जाता है।
    
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